जलपुरुष की चेतावनी, और भी भयावह होंगे हालात

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कानपुर। मौसम, जलवायु और वर्षा चक्र बदल रहा है। ग्लोबल वार्मिंग का असर पड़ रहा है। जबकि खेती करने का चक्र पुराना ही है। इसलिए अब वर्षा चक्र के अनुरूप खेती का शेड्यूल बनाना होगा। यह बात जल पुरुष प्रो. राजेन्द्र सिंह ने शहर में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत कर कहीं। उन्होंने कहा कि कंक्रीट के जंगल बनते जा रहे हैं। हरियाली गायब होती जा रही है। औद्योगिक क्षेत्र बस रहे हैं। जिससे मौसम चक्र भी प्रभावित हो रहा है।

राजेन्द्र सिंह

अब स्थिति ये है कि देश के 13 राज्यों की 64 करोड़ जनता पानी के लिए जूझ रही है। 302 जिलों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है। नदियां नाले में बदल रही हैं। मानव ने ही यह परिस्थिति पैदा की है। यदि अब इसे सहेजा न गया तो और भी भयावह हालात होंगे। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड में खेल हुआ है। जल मण्डी की जरूरत थी तो अनाजमंडी बना दी गई। यदि पानी होता तो अनाज की दिक्कत ही नहीं होती। अब पानी के स्रोत न बनाकर ट्रेन भेजकर राजनीति की जा रही है।

उन्होंने कहा कि कानपुर को कुदरती तौर पर गंगा माँ मिली हैं। लेकिन फिर भी उसकी कदर नहीं समझी जा रही है। यदि जल्द न समझे तो पछताना पड़ेगा। कहा कि गंगा 20 साल से आईसीयू में भर्ती है। डॉक्टर इलाज कर रहे हैं लेकिन नब्ज नहीं ढूंढ पा रहे हैं। जिससे साफ़ होने के बजाय और प्रदूषित होती जा रही है। जलपुरुष ने कहा कि भूगर्भ जल भण्डार खत्म होता जा रहा है। अभी भी सरकारें नहीं चेत रही हैं। भूजल संचयन कानून बनाया जाये जिससे जल दोहन पर अंकुश लग सके। उन्होंने कहा कि नेता नहीं समझ रहे, आगे पानी का मुद्दा भी वोट का आधार बनेगा।

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