राज्यसभा में पास हुआ HIV-AIDS रोगियों से भेदभाव रोकने वाला बिल

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नई दिल्ली। एचआईवी-एड्स पीड़ितों के साथ भेदभाव करने पर जेल की सजा और जुर्माना भी हो सकता है। साथ ही एचआईवी-एड्स पीड़ितों का मुफ्त इलाज करना अनिवार्य होगा। एचआईवी-एड्स रोगियों से भेदभाव रोकने और उन्हें स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के मकसद से लाए गए बिल को मंगलवार को राज्यसभा ने पारित कर दिया। इस बिल में ऐसे मरीजों से शिक्षण संस्थानों में दाखिले के साथ ही रोजगार देने में भेदभाव पर रोक लगाने का इंतजाम है। भेदभाव करने वाले को सजा देने का प्रावधान भी है।

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने की तारीफ, बोले- जीवन होगा बेहतर

इस बिल को 2014 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में राज्यसभा में पेश किया गया था, जहां से इसे संसद की स्वास्थ्य मामलों की स्थायी समिति को भेज दिया गया। स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि यह बिल एड्स रोगियों के उपचार और उनके जीवन को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगा।

इस बिल में एड्स रोगियों से भेदभाव रोकने के लिए 100 की संख्या तक के संस्थानों में एक शिकायत अधिकारी होगा। जहां संक्रमण का खतरा रहता है, मसलन अस्पताल, तो वहां 20 कर्मचारियों पर एक अधिकारी होगा। एचआईवी-एड्स प्रभावित लोगों के मामले में भारत का दुनिया में तीसरा नंबर है। इस बिल में एचआईवी-एड्स मरीजों को स्तरीय इलाज देने के साथ ही उनके इलाज से जुड़ी जानकारी को गुप्त रखने का भी इंतजाम है।

बिल के मुताबिक, कोई भी शख्स इस तरह के मरीजों को रोजगार आदि के साथ ही निवास और संपत्ति किराये पर लेने के मामले में भेदभाव नहीं कर सकता। इनको बीमा देने से भी मना नहीं किया जा सकता। 18 साल से कम के ऐसे शख्स को परिवार में रहने और परिवार की सुविधाओं को हासिल करने का अधिकार होगा।

इस बिल में यह भी प्रावधान है कि बिना रोगी की सहमति के उसकी जांच नहीं की जा सकती और न ही उस पर रिसर्च की जा सकती है। ऐसे लोगों को जरूरी दवाएं और चिकित्सा सहायता देना राज्यों और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी होगी।

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