राज्‍यपाल राम नाईक का दर्द …अच्‍छे स्‍कूल में पढ़ता तो कहां पहुंच जाता

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लखनऊ। राज्‍यपाल राम नाईक का दर्द यूं ही नहीं छलक पड़ा। गुरुवार को जब लखनऊ में मिलेनियम स्‍कूल की दूसरी शाखा का उद़घाटन करने पहुंचे यूपी के राज्‍यपाल राम नाईक ने स्कूल की बिल्डिंग देखी। क्लासेज देखे, कम्प्यूटर और म्यूजिक रूम भी देखा। फिर बोले काश मुझे भी इतना अच्छा स्कूल पढ़ने को मिलता तो मैं कहाँ से कहाँ पहुंच जाता। मैं तो गांव के एक छोटे स्कूल में पढ़ा हूँ जहां मेरे पिताजी मुख्य अध्यापक थे।
राज्‍यपाल राम नाईक

राज्‍यपाल राम नाईक ने कहा स्‍कूल की पहचान छात्रों से होती है

राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि गुणवत्तायुक्त शिक्षा देकर बच्चों को देश के लिए एसेट  के रूप में विकसित करें। ऐसी शिक्षा देने की आवश्यकता है जिससे मानवता का विकास हो और देश के काम आ सके। राज्‍यपाल राम नाईक ने कहा कि वर्ष 2020 तक भारत सबसे बड़ा युवा शक्ति वाला देश होगा। पीढ़ी का फर्क समझते हुए मातृभाषा का ध्यान अवश्य रखें। बच्चों में भारतीय परम्परा का ज्ञान देते हुए बड़ों का सम्मान करना सिखायें। राज्‍यपाल राम नाईक ने कहा कि स्कूल की पहचान वहां से निकलने वाले छात्रों से होती है।
अच्‍छी शिक्षा के लिए अच्‍छा अध्‍यापन जरूरी
राज्‍यपाल नाईक ने कहा कि अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी भाषा का भी प्रयोग बराबर होना चाहिए। बच्चों में मातृभाषा के प्रति गौरव होना चाहिए। पुरानी परम्पराओं से अच्छी बातें लेकर नयी परम्पराओं से जोड़ा जा सकता है।शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं होना चाहिए। इस अवसर पर लखनऊ के महापौर डाॅ0 दिनेश शर्मा, सांसद  कौशल किशोर, विधायक  गोमती यादव, मुरलीधर रामनारायण एजूकेशनल ट्रस्ट के अध्यक्ष टीसी अग्रवाल सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। महापौर डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि अच्छी शिक्षा के लिए अच्छा अध्यापक होना जरूरी है। बच्चों की प्रतिभा को बस्ते के बोझ से न दबायें। शिक्षण संस्थानों की फीस का स्तर ऐसा हो कि आम आदमी का बच्चा भी प्रवेश पा सके।

 

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