रावत सरकार की मुश्किलें बढीं, फिर हो सकती है बगावत!

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देहरादून। उत्तराखंड में एक बार फिर रावत सरकार की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं। पीडीएफ और कांग्रेस के बीच आजकल जुबानी जंग जारी है। जिसकी आवाज एक बार फिर दिल्ली दरबार में पहुंच गई। इस बार पीडीएफ के तेवर सख्त नजर आ रहे हैं।

रावत सरकार

रावत सरकार के नेताओं की जुबान पर लगे लगाम

बताया जा रहा है कि पीडीएफ नेताओं ने कांग्रेस आलाकमान से मिलकर प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय समेत तमाम रावत सरकार के नेताओं की जुबान पर अंकुश लगाने की मांग की है। पीडीएफ नेताओं ने आलाकमान से साफ तौर पर कह दिया है कि प्रदेश अध्यक्ष समेत तमाम पार्टी नेताओं की ओर से पीडीएफ को लेकर लगातार अनाप-शनाप बयानबाजी की जा रही है अगर इस पर रोक नहीं लगाई गई तो समर्थन वापसी पर भी विचार किया जा सकता है।

राजनीतिक संकट के दौरान जब सरकार गिर गई और राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया, उस दौरान भी पीडीएफ सरकार के साथ एकजुट रहा। अदालत के आदेश पर हुए फ्लोर टेस्ट के दौरान भी पीडीएफ एक बार फिर अपने वादे पर खरा उतरा, लेकिन अब कांग्रेस पार्टी की ओर से पीडीएफ की मंशा पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं। वह भी ऐसे वक्त में जबकि विधानसभा चुनाव नजदीक है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष समेत कुछ पार्टी नेताओं की ओर से जिस तरह की बयानबाजी की जा रही है वह न सिर्फ पीडीएफ-कांग्रेस गठबंधन के लिए सियासी तौर पर खतरनाक है, वरन विपक्षी भाजपा भी इसका पूरा राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर सकती है। ऐसे में पीडीएफ नेताओं का कहना है कि आलाकमान के स्तर पर बयानबाजी पर रोक लगायी जाए। जहां एक तरफ पीडीएफ नेताओं की केंद्रीय आलाकमान से बैठक की चर्चाएं रहीं।

बता दें कि पिछले दिनों आलाकमान ने सीएम रावत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को दिल्ली बुलाया था वहां कहा गया कि वह एकजुट होकर काम करें और बयानबाजी करने से बचें। लेकिन आलाकमान की सख्त हिदायत के बावजूद बयानबाजी का दौर थमा नहीं है।

 

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