राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने बनाई कोरोना की ‘आयुष-64’ दवा, जयपुर में होगा ट्रायल

नई दिल्ली। पूरी दुनिया कोरोना के कहर से कराह रही है। जिसके बाद इसकी दवा व वैक्सीन बनाने का काम शुरू हो गया है। पतंजलि के बाद भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली संस्था राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने कोरोना को लेकर चार दवाइयां बनाई हैं। जिनमें से एक का नाम है आयुष-64 है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर के जरिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने कोरोना के पॉजिटिव मरीजों पर पहली बार जयपुर में आयुष-64 का क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया है। इसका क्लिनिकल ट्रायल कोविड-19 के प्रथम स्टेज वाले मरीजों पर एक निजी अस्पताल में किया जा रहा है।

आयुर्वेद संस्थान के निदेशक ने कहा कि यह दवा सामान्यतः पहले हम लोग मलेरिया के लिए देते थे।लेकिन इसमें कुछ बदलाव के साथ अब इसे कोरोना मरीजों को दे रहे हैं। वहीं आयुर्वेद संस्थान ने कहा कि आयुष-64 का अध्ययन करने के लिए हमने क्लिनिकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन को अपने साथ लिया है। तीन चार महीने में इसके रिजल्ट सामने आ जाएंगे। शुरुआती जांच में नतीजे अच्छे आ रहे हैं।

आयुष मंत्री श्रीपद नाईक ने कहा कि आयुष मंत्रालय भी अपनी दवाई पर काम कर रहा है और जुलाई महीने तक आयुष मंत्रालय भी कोरोना की दवाई लेकर मार्केट में आ सकता है। वहीं कोरोनिल दवा पर आयुष मंत्री ने कहा कि पतंजलि आयुष मंत्रालय की बिना अनुमति लिए इसका विज्ञापन नहीं कर सकता है। लेकिन पतंजलि के इस दावे पर आयुष मंत्रालय ने बड़ी कार्रवाई की है। आयुष मंत्रालय ने बिना परमिशन कोरोनिल के प्रचार और बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ ही पंतजलि से जवाब तलब किया गया है। पतंजलि ने भी अपना जवाब भेज दिया है। जिसकी समीक्षा आयुष मंत्रालय की टास्क फोर्स करेगी।

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