बहादुरी में जान देने वाले यूपी के इस बेटे को मोदी करेंगे सम्मानित

लखनऊ। अदम्य साहस व वीरता का परिचय देने वाले फैजाबाद के शिवांश को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार (मरणोपरांत) से नवाजा जाएगा। शिवांश के पिता अरुण कुमार सिंह को ये नहीं पता था कि थोड़ी देर में घर आने की बात कहने वाला मेरा बेटा कभी घर वापस ही नहीं आएगा। अरुण कुमार सिंह इस बात की खुशी तो है कि उनके बेटे को वीरता पुरस्कार से नवाजा जा रहा है लेकिन वह कहते हैं कि यदि यह पुरस्कार वह खुद लेता तो खुशी दुगुनी होती।

Untitledराष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने वाले को कोई नहीं भुला सकता

 

गांधी नगर फैजाबाद उत्तर प्रदेश निवासी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि 17 जून 2015 की उस सुबह को वह भुला नहीं सकते जब उनका बेटा उनसे दूर चला गया। वह बताते हैं कि शिवांश अपने पांच मित्रों के साथ सरयू नदी के गुप्तार घाट पर स्नान के लिए गया हुआ था। स्नान करते हुए उनके मित्र विवेक 50-60 फीट गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। यह देखकर अन्य छात्र नदी से बाहर आकर चिल्लाने लगे। वह बहुत अच्छा तैराक था और ओपन चैंपियन मेडल भी जीता था।

तैराक होने के कारण शिवांश तैरकर उस तक पहुंचा और विवेक को बचाने का प्रयास किया। वह काफी समय तक जूझता रहा और कुछ हद तक उसे नदी किनारे भी ले आया परंतु इतनी मेहनत के बाद भी वह विवेक को बचा नहीं सका। दुर्भाग्वश शिवांश ने भी इस दुर्घटना में अपनी जान गवां दी। दसवीं के छात्र शिवांश को पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी काफी रुचि थी खासकर क्रिकेट व वॉलीबाल खेलना उसे बहुत पंसद था। उसके पिता का कहना है कि वह अपनी उम्र से तेज था इसलिए उन्हें डर लगता था।

गणतंत्र दिवस पर नवाजे जाएंगे 25 बच्चे

 

अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरे की जान बचाने वाले देश भर के 25 बच्चों को उनकी बहादुरी के लिए वीरता पुरस्कार 2015 से सम्मानित किया जाएगा। इन बच्चों में 22 लड़के व तीन लड़कियां शामिल हैं। इनमें से महाराष्ट्र के गौरव कवडूजी सहस्त्रबुद्धे व उत्तर प्रदेश के शिवांश सिंह को मरणोपरांत यह पुरस्कार दिया जाएगा। गणतंत्र दिवस से पहले 24 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन सभी बच्चों को पुरस्कृत करेंगे। जिसके बाद ये बच्चे गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा लेंगे।

इन्होंने दिया साहस का परिचय

 

राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों में सबसे खास भारत अवार्ड महाराष्ट्र के 15 वर्ष 10 माह के गौरव कवडूजी सहस्त्रबुद्धे को दिया जाएगा। गौरव ने साहस का परिचय देते हुए चार जीवन को बचाने की खातिर अपने प्राणों की आहुति दे दी। गीता चोपड़ा अवार्ड तेलंगाना की आठ वर्ष एक माह की शिवमपेट रुचिता को दिया जाएगा। वीरता पुरस्कार पाने वाली रुचिता सभी बच्चों में सबसे कम उम्र की हैं। उन्होंने रेलवे क्रॉसिंग पर रेलगाड़ी की बस में टक्कर से पहले साहस व दृढ़ता का परिचय देते हुए दो जिंदगियों को बचाया। संजय चोपड़ा अवार्ड उत्तराखंड (गढ़वाल) के16 वर्षीय अर्जुन सिंह को दिया जा रहा है। उन्होंने अपनी मां को बाघ केहमले से बचाया था। वहीं, बापू गेधानी अवार्ड केरल के12 वर्ष चार माह के एरोमल एस एम, मिजोरम के15 वर्ष 3 माह की रामदिनथारा, गुजरात के13 वर्षीय राकेशभाई शनाभाई पटेल को दिया जाएगा।

ये बच्चे किए जाएंगे सम्मानित

 

वीरता पुरस्कार से सम्मानित होने वाले अन्य बच्चों में महाराष्ट्र के नौ वर्ष 2 माह के निलेश रेवाराम भिल, छत्तीसगढ़ की 10 वर्ष आठ माह की जोएना चक्रवर्ती, उत्तर प्रदेश की 10 वर्ष 11 माह के भीमसेन उर्फ सोनू, गुजरात के 10 वर्ष 9 माह की कशिश धनानी, महाराष्ट्र के 9 वर्ष 8 माह के वैभव रामेश्वर घंगारे, हरियाणा पंचकूला के 12 वर्ष सात माह के दिशांत मेहंदीरत्ता, मणिपुर के 12 वर्ष 11 माह के चोंगथाम कुबेर मेतैई, मेघालय की 13 वर्ष 2 माह की एंजेलिका टिनसांग, महाराष्ट्र के 14 वर्ष 7 माह केमोहित महेंद्र दलवी, केरल के 13 वर्ष 7 माह के नितिन फिलिप मैथ्यू, छत्तीसगढ़ के15 वर्ष 7 माह के सर्वानंद साहा, केरल के14 वर्ष 9 माह केबीधोवन और14 वर्ष सात माह केआनंदु दिलीप, मणिपुर के14 वर्ष आठ माह केमॉरिस येंगखाम, केरल के 15 वर्ष एक माह के अभिजीत केवी, तेलंगाना के 14 वर्ष 11 माह केसाईं कृष्णा अखिल किलांबी, केरल के14 वर्ष एक माह केमोहम्मद शमनाद, ओडिशा के 17 वर्ष नौ माह के अविनाश मिश्रा व उत्तर प्रदेश के 13 वर्ष नौ माह केशिवांश सिंह शामिल हैं।

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