राहुल गांधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का इंतजार सबसे ज्यादा इन 600 लोगों को है

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नई दिल्ली। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की बुरी हालत होने के बाद पार्टी के भीतर से ही बड़ी सर्जरी की मांग की जा रही है। इस सर्जरी का मतलब कुछ लोग राहुल गांधी को बड़ी जिम्मेदारी देने से लगा रहे हैं तो कुछ इसे उनकी क्षमता पर सवाल समझ रहे हैं! 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से कांग्रेस बुरे प्रदर्शन के दौर से उबर नहीं सकी है। इसके बाद से ‘टीम राहुल गांधी’ अपने नेता के ऐक्शन में आने के इंतजार में बैठी हुई है।

राहुल गांधी

राहुल गांधी की टीम यानि 600 युवा

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी सर्कल में टीम राहुल गांधी से मतलब देशभर के 600 युवाओं की टीम से है, जिनको कॉर्पोरेट स्टाइल में इंटरव्यू लेकर चुना गया था। पिछले साल राहुल गांधी ने खुद इन सब युवा कांग्रेसी नेताओं के इंटरव्यू लिए थे। हालांकि, इनको अब तक पता नहीं है कि काम कबसे शुरू करना है! सूत्रों के मुताबिक इन्हें राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने का इंतजार है।

क्या कहते हैं रोहित चौधरी

2003 में दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के प्रेजिडेंट रहे रोहित चौधरी कहते हैं, ‘पहले मैं राहुल जी से दिल्ली की राजनीति के बारे में बात करता था। उनसे मिलने के दौरान मैं काफी उत्साहित रहता था। मैंने दिल्ली MCD के उपचुनावों में काम्बोज नगर में भी काम किया।’ रोहित NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनके जैसे कई और युवा हैं, जो जिम्मेदारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

राहुल पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी युवाओं को देते हैं

कुछ समय पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष द्वारा चुने गए इन युवा नेताओं को जिम्मेदारी देने पर बात चल रही थी कि तभी राहुल गांधी के सलाहकर्ताओं को लगा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता इसके लिए उत्साहित नहीं हैं। लोकसभा चुनावों के परिणामों के बाद सीनियर नेताओं को लगा कि अगर राहुल पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी युवाओं को देते हैं तो उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भरोसा दिलाया गया कि टीम राहुल में युवा और अनुभवी दोनों चेहरे शामिल रहेंगे।

राहुल ने AICC में 40 युवा सदस्यों को शामिल किया था

पार्टी के एक सीनियर नेता ने कहा कि लोकसभा चुनावों के बाद पार्टी की हालत बुरी होने के बाद राहुल ने बदलाव की शुरुआत की थी। राहुल ने AICC (ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी) में 40 युवा सदस्यों को शामिल किया था। इससे पार्टी में उम्मीद जगी थी कि बदलाव शुरू हो गया है। पार्टी नेताओं को लगता है कि अब यह हलचल भी शांत हो गई है। पार्टी के कई युवा नेता तो अपने भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं और कई नेता दूसरे उपायों पर भी विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि राहुल गांधी पार्टी में युवाओं को लोकतांत्रिक स्पेस देने की कोशिश कर रहे हैं और चाहते हैं, इसलिए उन्हें फ्रंट सीट पर आने में समय लग रहा है।

 

(नवभारत टाइम्स से साभार)

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