पीएम मोदी ने रेल बजट को बनाया ‘आम’, बचाए दस हजार करोड़

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नई दिल्‍ली। पीएम मोदी ने देश की भलाई के लिए एक और साहसिक कदम उठाया है। ऐसा करके उन्‍होंने देश और रेलवे के करीब दस हजार करोड़ रुपये बचा लिए हैं। पीएम मोदी ने कैबिनेट बैठक में यह महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया है कि रेल बजट अलग से पेश नहीं किया जाएगा। रेल बजट आम बजट के साथ ही पेश होगा।

नरेंद्र मोदी

91 साल से चली आ रही थी रेल बजट की परंपरा

जैसे ही पीएम मोदी ने यह निर्णय लिया वैसे ही कैबिनेट ने रेल बजट को आम बजट में मिलाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इसके साथ ही अब संसद की मंजूरी के बाद आगामी साल से एक ही बजट पेश किया जाएगा। यानी अब अलग से रेल बजट पेश करने की जरूरत नहीं होगी।

1924 से पेश हो रहा था रेल बजट

1924 से अब तक आम बजट से अलग रेल बजट पेश होता रहा है। आगामी वित्त वर्ष के लिए साल 2017 में अब सिर्फ और सिर्फ आम बजट ही संसद में पेश किया जाएगा। रेल मंत्रालय का वित्तीय लेखा-जोखा भी आम बजट का उसी तरह से हिस्सा होगा, जैसे दूसरे मंत्रालय के लिए होता है। वैसे तो आम बजट में रेल बजट के मर्जर के सैद्धांतिक सहमति हो गई है। इसके लिए नीति आयोग के प्रस्ताव पर रेलमंत्री ने अपनी सहमति पहले ही जता दी है।

मंत्रालयों के अधिकारों का बंटवारा बाकी

रेलवे के आला अफसरों के मुताबिक वित्त मंत्रालय ही अब रेल मंत्रालय का बजट तय करेगा लेकिन अभी भी दोनों मंत्रालयों के अधिकारों का बटंवारा बाकी है और इसके लिए क्या प्रक्रिया होगी इसको भी तय किया जाना बाकी है। वित्त मंत्रालय और रेल मंत्रालय के बीच जिन विषयों पर अभी अतिम फैसला होना बाकी है उनमें पेंशन की देनदारी, डिवीडेंड, रेलवे को वित्त मंत्रालय से मिलने वाले ग्रॉस बजटरी सपोर्ट और किराया तय करने का अधिकार जैसे मसले हैं।

किराया तय करने का अधिकार अपने पास रखना चाहता है रेल मंत्रालय

रेल मंत्रालय किराया और माल भाड़ा तय करने के अधिकार को अपने पास रखना चाह रहा है। इसके अलावा रेल मंत्रालय बाजार से पैसा उठाने के अधिकार को भी वित्त मंत्रालय को नहीं देना चाहता। रेल मंत्रालय की सबसे बड़ी चिंता है कि सातवें वेतन आयोग का बोझ और माल भाड़े से हो मिल रहे राजस्व में आ रही तेज कमी। इसके चलते पहले से ही आर्थिक परेशानियों का दबाव झेल रहे रेल मंत्रालय के लिए डिविडेंट देने से लेकर ऑपरेशनल लागत निकाल पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में आम बजट में विलय के साथ रेल मंत्रालय के अधिकारो में और कटौती हुई तो उनकी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

ये है रेलवे का बजट प्लान

इस साल के रेलवे के बजट प्लान की बात करें तो 2016-17 के दौरान रेलवे को कर्मचारियों की सैलरी के लिए तकरीबन 70 हजार करोड़ रुपये चाहिए। रेलवे को गाड़ियों के ईंधन बिजली के लिए तकरीबन 23 हजार करोड़ रुपये चाहिए। रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन की मद में तकरीबन 45 हजार करोड़ रुपये की जरूरत है। इसी के साथ भारत सरकार को डिवीडेंड के तौर पर देने के लिए रेलवे को तकरीबन 5500 करोड़ रुपये की धनराशि चाहिए।

रेल टैरिफ अथॉरिटी बनेगी

रेलवे के जानकारों के मुताबिक आम बजट में रेल बजट के विलय के साथ भारतीय रेलवे को वित्तीय तौर पर आजादी मिल सकेगी। इसी के साथ ऐसा माना जा रहा है कि भारतीय रेलवे को डिवीडेंड देने से मुक्ति मिल जाएगी। इसके अलावा रेल मंत्रालय को अब वित्त मंत्रालय के सामने ग्रॉस बजटरी सपोर्ट के लिए गिड़गिड़ाना नहीं पड़ेगा। इसी के साथ ऐसा माना जा रहा है कि वित्त मंत्रालय सातवें वेतन आयोग की वजह से रेल मंत्रालय पर पड़ रहे भारी भरकम बोझ को साझा करने में भी सहयोग करेगा। एक बड़ी बात ये है कि रेल किराया बढ़ाने के अधिकार को लेकर वित्त और रेल मंत्रालय के बीच इस बात पर सहमति है कि आने वाले दिनों में किराए में कमी और बढ़ोतरी के लिए रेल टैरिफ अथॉरिटी बनाई जाएगी। आम बजट में रेल बजट के मर्जर के बाद भी रेल मंत्रालय को नई रेलगाडि़यों और परियोजनाओं के ऐलान की छूट होगी।

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