भारत में शामिल हुआ दुनिया का सबसे ताकतवर हथियार- बस एक बटन दबा, पाक-चीन तबाह

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नई दिल्ली। सरकार ने फ्रांस के साथ 36 रॉफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के बहुप्रतिक्षित सौदे को मंजूरी प्रदान कर दी जिस पर 7.878 अरब यूरो की लागत आएगी। दोनों देशों के एक्सपर्ट्स ने सौदे के सभी बिन्दुओं को आखिरी रूप दे दिया है। विमानों की सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के बाद से 36 महीनों के अंदर शुरू होगी और 66 महीनों में ही सारे विमान भारत को मिल जाएंगे।

रॉफेल लड़ाकू विमान

 

रॉफेल लड़ाकू विमान इंडियन एयरफोर्स में अब तक का सबसे बड़ा सौदा माना जा रहा है

मीडिया रिपोरेट्स के मुताबिक, इंडियन एयरफोर्स का अब तक का सबसे बड़ा सौदा माना जा रहा है। रॉफेल का निर्माण करने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसाल्ट इन विमानों को न केवल वायुसेना को उपलब्ध कराएगी, बल्कि हवा से दुश्मन पर अचूक निशाना लगाने वाली हथियार प्रणाली भी सौंपेगी। करीब 60 हजार करोड़ रुपए के रॉफेल विमानों की खरीद सीधे डसाल्ट से करने की जगह भारत ने फ्रांस सरकार के साथ समझौते की राह अपनाने फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा सौदों में दलाली के उठने वाले सवालों को देखते हुए कंपनी की जगह फ्रांस सरकार के माध्यम से रॉफेल सौदे को अमलीजामा पहनाने का फैसला लिया था। मोदी की फ्रांस यात्रा में ही इसके लिए समझौता भी हुआ था। लेकिन पिछले डेढ साल से विमानों की कीमत और सौदे की शर्तो को लेकर रस्साकशी चल रही थी।

रॉफेल लड़ाकू विमान की ये है खूबियां 

राफेल को फ्रांस की डसाल्ट बनाती है। राफेल का फ्रेंच में मतलब होता है तूफान। राफेल 2 इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट है।
– स्पीड 2250-2500 किमी प्रति घंटे तक। फ्यूल कैपेसिटी 4700 किग्रा।
– एयरबेस के साथ एयरक्राफ्ट कैरियर से भी उड़ान भर सकता है। ब्रह्मोस जैसी 6 एटमी हथियार वाली मिसाइल ढोने की काबिलियत।
– 3 लेजर गाइडेड बम, हवा से जमीन पर मार करने वाली 6 मिसाइल। हवा में भी फ्यूल भरने की कैपेसिटी। लगातार 10 घंटे तक उड़ सकता है।
– फ्रांस सरकार ने 4 यूरोपीय देशों के साथ मिलकर इसे बनाना शुरू किया था।
– बाद में जब बाकी तीन देश अलग हो गए तो फ्रांस ने अकेले दम पर ही प्रोजेक्ट को पूरा किया।
– राफेल को लीबिया, माली और इराक में इस्तेमाल किया जा चुका है। अफगानिस्तान में अल कायदा के खिलाफ नाटो के अभियान में इसका अहम रोल था।

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