लकवे के मरीज यहां आते हैं सहारे से लौटते हैं खुद चलकर

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लकवे के मरीज ठीक हो जाते हैं सिर्फ सात दिन में। विज्ञान के युग में अगर कोई ऐसे चमत्कार की बात करे तो जल्दी कोई यकीन नहीं करेगा लेकिन अगर चमत्कार हो जाए तो कह दिया जाता है कि संयोग से ऐसा हो गया होगा। यकीन तो नहीं होता।

Chatur Das ji Mandirलकवे के मरीज की भी यही स्थिति है सालों गुजर जाते हैं कोई चल नहीं पाता कोई बोल नहीं पाता दवा चलती रहती है। डाक्टर बैद्य या हकीम समय के साथ ठीक होने की बात करते रहते हैं। लेकिन जल्दी कोई ठीक नहीं कर पाता। लेकिन ऐसी भी एक जगह है जहां मात्र कुछ दिन में ही सुधार हो जाता है। इतना सुधार कि प्रत्यक्ष दिखायी देने लगता है। आज हम आपको ऐसी  ही जगह के बारे में बताने जा रहे हैं।

लकवे के मरीज

लकवे के मरीज आस्था से आते हैं ठीक होकर जाते हैं

यह जगह है राजस्थान में अजमेर-नागौर रोड पर बूटाटी ग्राम जहां लकवे के मरीजों को चिकित्सकों के इलाज के बावजूद श्रद्धा खींच लाती है। कहते हैं यहाँ से हर साल हजारो लोग पैरालायसिस (लकवे के मरीज) के रोग से मुक्त होकर जाते है।

botati dhamयह धाम नागोर जिले के कुचेरा क़स्बे के पास है – अजमेर- नागोर रोड पर यह गांव है  लगभग पांच सौ साल पहले एक संत हुए थे चतुरदास जी वो सिद्ध योगी थे- वो अपनी तपस्या से लोगो को रोग मुक्त करते थे  आज भी इनकी समाधि पर लकवे के मरीज के सात फेरी लगाने से लकवा जड़ से ख़त्म हो जाता है – नागोर जिले के अलावा पूरे देश से लोग आते है और रोग मुक्त होकर जाते है हर साल वैसाख, भादवा और माघ महीने मे पूरे महीने मेला लगता है।

यह मंदिर सिद्ध पुरुष चतुरदास जी महाराज की समाधि है लकवा के मरीजों को सात दिन का प्रवास करते हुए रोज एक परिक्रमा लगाते हैं -सुबह की आरती के बाद पहली परिक्रमा मंदिर के बाहर तथा शाम की आरती के बाद दूसरी परिक्रमा मंदिर के अन्दर लगानी होती है  ये दोनों परिक्रमा मिलकर पूरी एक परिक्रमा कहलाती है सात दिन तक मरीज को इसी प्रकार परिक्रमा लगानी होती है।

मरीज स्वयं चलने फिरने में असमर्थ होते हैं उन्हें परिजन परिक्रमा लगवाते हैं निवास के लिए यहाँ सुविधा युक्त धर्मशालाएं हैं यात्रियों को जरुरत का सभी सामान बिस्तर , राशन , बर्तन, जलावन की लकड़ियाँ आदि निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं इसके अतिरिक्त पास में ही बाजार भी हैं जहाँ यात्री अपनी सुविधा से अन्य वस्तुएं खरीद सकते हैं हर माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को यहाँ मेला लगता है इसके अतिरिक्त वैशाख , भाद्रपद और माघ महीने में भी विशेष मेलों का आयोजन होता है।

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