चुनाव आ रहें पास और भाजपा के अपने हो रहे दूर…

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पणजी: गोवा में गठबंधन सरकार में शामिल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के बीच का संकट और बढ़ गया है। मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने साफ कहा है कि एमजीपी के मंत्रियों को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने चाहिए। उन्होंने एमजीपी के सदस्यों से कहा कि वे उनकी धैर्य की परीक्षा न लें।

लक्ष्मीकांत पारसेकर

लक्ष्मीकांत पारसेकर के शासन से खुश नहीं है एमपीजी

एमजीपी के नेता व लोक निर्माण विभाग के मंत्री सुधीन धवलिकर ने रविवार को कहा था कि वह लक्ष्मीकांत पारसेकर के नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं। इस संबंध में पूछे जाने पर पारसेकर ने कहा कि उन्हें त्याग पत्र देकर चला जाना चाहिए। वह वहां बने रहते हैं, अंतिम क्षण तक सत्ता सुख का आनंद लेते हैं और अब आखिरी लम्हों में वह एक नए झंडे के साथ बहिर्गमन करना चाहते हैं। यह उचित नहीं हैं। उन्हें थोड़ा सोचना चाहिए। अगर उन्हें मान, मर्यादा का ख्याल है तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

अगले साल के शुरू में गोवा विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके मद्देनजर भाजपा और उसके सहयोगी दल एमजीपी के बीच राजनीतिक तकरार बढ़ गई है। 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा में 21 सदस्यों के साथ भाजपा को साधारण बहुमत प्राप्त है, जबकि एजीपी के तीन सदस्य हैं जिनमें दो कैबिनेट मंत्री हैं। साल 2007 से 2012 के बीच एमजीपी सत्ताधारी कांग्रेसनीत गठबंधन की सदस्य थी।

लक्ष्मीकांत पारसेकर ने यह भी कहा कि भाजपा और खुद वह, एमजीपी को समायोजित करते रहे हैं, लेकिन उनके नेताओं द्वारा की गई टिप्पणियां उनके धैर्य की परीक्षा ले रही हैं।

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