लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर में टूटी 700 साल पुरानी परंम्परा

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लखनऊ। महाशिवरात्रि पर लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर में 700 साल पुरानी परंम्परा टूट गई। इस मंदिर में 700 साल से शि‍वलिंग का जलाभिषेक गंगाजल से किया जाता रहा है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। शिवलिंग का जलाभिषेक तो हुआ लेकिन गंगाजल से नहीं गोमती के पानी से। जब से लखनऊ में मनकामेश्वर मंदिर की स्थापना हुई है ऐसा पहली बार किया गया है। सोमवार की सुबह से हजारों की संख्या में श्रद्धालु गोमती के पानी से भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं।

लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर

लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर की महंत बोली गोमती के पानी की क्वालिटी सुधर रही है

लखनऊ के मनकमेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर सोमवार को पहली बार शिवलिंग का जलाभिषेक गोमती के पानी से किया गया। सुबह से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु गोमती के पानी से भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं। गोमती के पानी से जलाभिषेक के साथ ही मंदिर में 700 साल पुरानी परंम्परा टूट गई। गोमती के पानी से जलाभिषेक की नई परंम्परा डालने वाली मंदिर की महंत दिव्या गिरी ने बताया कि गोमती के पानी से भगवान शिव का अभिषेक कर यह सन्देश देना चाहते हैं कि देश की नदियों को स्वच्छ रखना कितना जरुरी है।

महंत गिरी ने बताया कि गोमती के पानी की क्वालिटी में भी काफी सुधार आया है है। यही वजह है कि इस बार हमने यह व्यवस्था की है। उन्होंने कहा, गोमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है।  उम्मीद है गोमती का पानी और भी साफ़ हो जाएगा। इसलिए हम चाहते हैं कि गोमती की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए लोगों की धार्मिक आस्था को भी इससे जोड़ा जाए।

महंत दिव्या गिरी का मानना है कि जब हम किसी जल को आस्था से जोडेंगे तो उसे स्वच्छ रखना हमारी आदतों में शुमार हो जाता है। हम खुद भी चाहेंगे कि हमारी नदी साफ रहे और हम इसका जल पूजा अर्चना में इस्तेमाल कर सकें। इसलिए इस बार शिवरात्रि पर ऐसा किया गया है।

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