लड़ाकू विमान MIG-21 उतरा लखनऊ के पार्क में

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लखनऊ। लड़ाकू विमान MIG-21 लखनऊ के एक पार्क में उतर आया है। ये सुनकर आप हैरान हो सकते हैं लेकिन ये सच है। दरअसल राजधानी स्थित एशिया के सबसे बड़े जनेश्वर पार्क में मिग विमान सुपर सोनिक का मुख्यमंत्री ने आज लोकार्पण किया। कार्यक्रम में एयर मार्शल श्याम बिहारी प्रसाद सिन्हा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 17 लाख लैपटॉप भी बांटे। साथ ही 251 लोगों को बैटरी रिक्शाभी बांटे।

लड़ाकू विमान MIG-21

लड़ाकू विमान में हैं कई खूबियां

 

एयर मार्शल श्याम बिहारी प्रसाद ने मिग विमान की खूबियां बताते हुए कहा कि मिग विमान ने 1965 में महत्वपुर्ण भूमिका निभाई थी । यूपी में युवा और बच्चे इस जहाज से प्रेरणा लेंगे। इससे लोगों का वायु सेना में भर्ती होने के प्रति रूझान भी बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा…

 

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा की समाजवादी पेंशन को बढाकर 45 लाख से 60 लाख कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बजट में किसानों के लिए सुविधाएं दी जाएंगी वहीं नौजवानों के लिए भी कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग हमारी नकल कर रहे हैं। वहीं आगे बढ़कर काम करने के मामले में हम समाजवादियो का कोई मुकाबला नहीं कर सकेगा। हमारी योजनाओ पर कोई भी बहस कर सकता है उसे करने दीजिए। वहीं फ़ेसबुक पर फोटो वायरल करने पर विधायक प्रत्याशी का टिकट काटने पर मुख्यमंत्री ने बसपा पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की तरह इतनी पार्टी नहीं है जहां केवल फ़ोटो लगाने पर टिकट काट दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा की इतनी सहूलियत देने वाली सरकार कोई नहीं हो सकती है।  बुंदेलखंड के दर्द को को केवल सपा ने ही समझा है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार ने इतना लंबा एक्सप्रेस वे नही बनवाया। इस एक्सप्रेस वे को हम आगे पूर्वांचल तक ले जाएंगे।

क्या है मिग-21

 

मिकोयान-गुरेविच मिग-21 (Mikoyan-Gurevich MiG-21) एक सुपरसोनिक लड़ाकू जेट विमान है। जिसका निर्माण सोवियत संघ के मिकोयान-गुरेविच डिज़ाइन ब्यूरो ने किया है। इसे “बलालैका” के नाम से बुलाया जाता था क्योंकि यह रुसी संगीत वाद्य ऑलोवेक की तरह दीखता था। इसकी पहली उड़ान 14 फ़रवरी 1955 को हुई थी।

विवादों के साए में रहा मिग-21

 

1963 में भारत के आकाश में पहली बार सुपरसोनिक लड़ाकू विमान मिग-21 की गरज सुनाई दी थी। चीन के हमले से दो महीने पहले अगस्त, 1962 में सोवियत संघ से मिग-21 विमान खरीदने का समझौता किया गया। मिग-21 ने 1963 में चंडीगढ़ से पहली उड़ान भरी। समझौते के तहत सोवियत संघ ने मिग-21 विमान भारत में ही बनाने की टेक्नोलाजी मुहैया कराई। हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स में मिग-21 विमान का निर्माण होने के बाद वायुसेना के लड़ाकू विमान बेड़े में मिग-21 विमानों का पचास फीसदी से ज्यादा आधिपत्य हो गया।

एक इंजन वाले इस जेट विमान ने पाकिस्तान के खिलाफ 1965 व 1971 में हुए युद्ध में अपनी उपयोगिता भी साबित की। 1963 से वायुसेना के बेड़े में शामिल हुए आठ सौ से ज्यादा मिग-21 विमानों में से करीब 280 हादसों में ध्वस्त हो चुके हैं। एक इंजन वाले इस लड़ाकू विमान के विदा होने के फिलहाल कोई आसार नहीं हैं। पुरानी पीढ़ी के मिग-21 विमानों को जरूर हटा दिए गए हैं। करीब दो सौ मिग-21 विमान वायुसेना के बेड़े में सक्रिय है। सौ परिष्कृत मिग-21 विमानों को वायुसेना 2017 तक इस्तेमाल करने वाली है।

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