लाठी का सहारा लेने की उम्र में महिला जोत रही खेत, बनी मिसाल  

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रुद्रप्रयाग। पहाड़ों से पलायन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। लेकिन इसी बीच एक ऐसी वृद्ध महिला भी है जो तमाम मुशीबतों के बाद भी पहाड़ों को अपना आशियाना बनाए हुए है। हर आने वाली समस्‍याओं को टक्‍कर दे रहीं है। पहाड़ो पर जहां लोग खेती को छोड़कर जा रहे हैं और अन्‍य कामों को कर रहें हैं वहीं 50 वर्ष एक महिला खेती करके लोगों के लिए मिसाल बनीं हुई है। जो काम पहले पुरुषों का कहा जाता था उसे आज ये बाखूबी कर रही हैं। ये स्‍वयं खेतों में हल जोतकर अपना जीवन यापन करती हैं।

सौजन्‍य से इनांडु इंडिया

मिली जानकारी के अनुसार ये महिला जनपद बरसूदी निवासी आशा देवी हैं, जो आज महिलाओं के साथ ही पुरुषों के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरी है। इस अवस्‍था में ये खेती कार्य को इतनी सहजता से करती है कि पुरुष वर्ग भी देखकर इनका कायल बन जाता है। बता दें कि ये अपने खेतों में खुद ही हल चलाती है, साथ ही फौवड़ा लेकर खेत के कोनों की सफाई भी। मौजूदा समय में महिला गांव में अकेली रहती हैं। बताया जा रहा है कि इनका एक एकलौता बेटा भी है जो मुंबई के किसी होटल में नौकरी कर रहा है।

सौजन्‍य से अन्‍य पोर्टल

सूत्रों के मुताबिक पहाड़ों पर महिलाएं हल नहीं चलाती हैं। स्‍थानिए मान्‍यता है कि इससे कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। क्‍योंकि यहां पर ऐसा करना अपशगुन माना जाता है। वहीं इससे दूर और उच्‍च सोच के साथ 50 वर्षीय आशा देवी ने इन सब अंधविश्वासों को पीछे छोड़कर समाज को जगाने का कार्य किया है।

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