मुलायम से सुलह के लिए लालू ने किया अखिलेश को फोन, मिला हैरान करने वाला जवाब

0

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी सपा मुखिया मुलायम सिंह और उनके बेटे सीएम अखिलेश यादव में  सियासत को लेकर दूरियां लगातार बढती जा रहीं हैं। सुलह को लेकर सारी कोशिशें लगातार नाकाम होती जा रहीं हैं। लेकिन लोग अभी भी बाप-बेटे के बीच सुलह कराने में जुटे हैं। इस कड़ी में राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अखिलेश और मुलायम को एक साथ लाने की कोशिश की।

लालू प्रसाद यादव

लालू प्रसाद यादव की मजबूरियां, किसका साथ दें

लालू प्रसाद यादव ने अखिलेश यादव को फोन किया और उन्हें पिता के साथ मिलकर पार्टी चलाने का आग्रह किया। लेकिन अखिलेश कहां सुनने वाले उन्होंने लालू का यह प्रस्ताव बड़ी विनम्रता से ‘नो थैंक्स’ कहकर कुछ ही मिनटों में ही ठुकरा दिया।

ये भी पढ़ें:तंत्र-मंत्र जानता तो मोदी को हटाकर नेताजी को पीएम बनाता

बाद में लालू प्रसाद यादव ने मीडिया से बुधवार को कहा, ‘मैंने अखिलेश को देर रात फोन कर सलाह दी थी कि वह मुलायम सिंह यादव से सुलह कर ले, लेकिन मुझे निराशा हाथ लगी।’

लालू प्रसाद यादव ने माना कि यदि मुलायम और अखिलेश का गुट अलग-अलग चुनाव लड़ेगा तो इससे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को ही फायदा होगा। राजद सुप्रीमो ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यूपी चुनाव के बाद सब ठीक हो जाएगा। प्रदेश में अखिलेश की सरकार बनते ही मुलायम सिंह यादव की आदर के साथ समाजवादी पार्टी में अध्यक्ष पद पर जरूर वापसी होगी।

ये भी पढ़ें : मुलायम बोले, बाप-बेटे के बीच कोई झगड़ा नहीं, अखिलेश ही होंगे सीएम फेस

दरअसल, लालू प्रसाद यादव की इस पहल के पीछे सियासी मजबूरियों के अलावा कुछ और कारण भी है। लालू और मुलायम आपस में रिश्तेदार भी हैं। लालू की बेटी की शादी मुलायम के पोते तेजप्रताप यादव से हुई है अखिलेश और तेजप्रताप एक-दूसरे के करीबी माने जाते हैं। वहीँ लालू मुलायम के करीबी ऐसे में उनके सामने असमंजस की स्थिति है कि वो किसका साथ दें और किसका नहीं।

वहीँ समाजवादी पार्टी की बात करें तो आज का दिन में काफी अहम रहने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुलायम कड़े फैसले ले सकते हैं। हालांकि इससे पहले मुलायम कह चुके हैं कि सीएम अखिलेश यादव ही समाजवादी पार्टी के सीएम फेस होंगे।

इसके बाद मंगलवार को अखिलेश यादव के साथ डेढ़ घंटे चली बैठक को लेकर तमाम राजनीतिक विश्लेषक अंदाजा लगाते रहे कि सुलह की गुंजाइश बढ़ती दिख रही है।

 

 

 

loading...
शेयर करें