लिव-इन में रहने वाले कपल के लिए खुशखबरी, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ये बड़ा फैसला

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर दोनों लोगों की शादी की उम्र नहीं है तो वह लिव-इन में रह सकते हैं। कोर्ट ने एक मामले की सुनाई के दौरान ये फैसला सुनाया है।

लिव-इन
दरअसल, SC का यह आदेश अप्रैल 2017 के एक मामले में आया है जिसमें शादी के समय लड़की तुषारा 19 साल की थी और लड़का नंदकुमार 20 साल का था। लड़की के पिता का आरोप था कि लड़के ने उनकी बेटी का अपहरण कर लिया, जिसके बाद केरल उच्च न्यायालय ने इस शादी को रद्द कर दिया और लड़की को उसके पिता के पास भेज दिया था। लेकिन केरल हाई कोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तुषारा को लिव इन रिलेशन में रहने की इजाजत दे दी है।

जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की बेंच ने कहा कि अगर दोनों दंपति शादी की उम्र के नहीं थे तो भी उन्हें लिव इन में रहने का अधिकार है। जज ने कहा कि जबतक लड़का और लड़की अपनी मर्जी से एक साथ रहने के लिए तैयार हैं उन्हें को इससे रोका नहीं जा सकता है। ऐसे में राज्य की यह जिम्मेदारी है कि उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाए अगर वह खुद की रक्षा नहीं कर सकते हैं।

इतना ही नहीं यह लड़का-लड़की पर निर्भर है कि जब उनकी उम्र शादी योग्य हो जाए तो वे फिर से विवाह करना चाहते है या ऐसे ही इस रिश्ते को निभाना चाहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीवनसाथी चुनने का अधिकार युवक-युवती से कोई नहीं छीन सकता, चाहे फिर वह कोर्ट हो, कोई संस्था या संगठन ही क्यों न हो। घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि अदालत का काम है कि वह निष्पक्ष निर्णय ले न कि एक मां की तरह भावनाओं में बहे और न ही एक पिता की तरह अंहकारी बने।

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