अगर आप में हैं ये लक्षण तो आप भी हो सकते हैं ‘लेस्बियन’

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सुप्रीम कोर्ट ने तीसरे लिंग को मान्यता तो दे दी, पर अक़्सर लोगों को ये साफ़ नहीं होता कि खुद को L, G, B, T, I, Q कहने वाले लोग कौन हैं और कैसे एक दूसरे से फ़र्क हैं….

L – ‘लेस्बियन’: जब एक औरत को एक और औरत से ही प्यार हो तो उन्हें ‘लेस्बियन’ कहते हैं। आम तौर पर माना जाता है कि किन्हीं दो लेस्बियन पार्टनर्स में एक का व्यक्तित्व आदमी जैसा होगा जिसे ‘बुच’ कहा जाता है। वो पैंट-शर्ट पहनती होगी और छोटे बाल रखना पसंद करेंगी। दूसरी पार्टनर की शख़्सियत औरत जैसी होगी जिसे ‘फेम’ कहा जाता है। वो स्कर्ट-सूट-साड़ी पहनती होगी और लंबे बाल रखना पसंद करेंगी। पर ये पुरानी सोच है। किन्हीं दो ‘लेस्बियन’ पार्टनर्स में कैसी भी शख़्सियत हो सकती है, एक को आदमी जैसी और एक का औरत जैसी होना ज़रूरी नहीं है।

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लेस्बियन

G – ‘गे’: जब एक आदमी को एक और आदमी से ही प्यार हो तो उन्हें ‘गे’ कहते हैं। वैसे ‘गे’ शब्द का इस्तेमाल कई बार सभी समलैंगिकों यानी पूरे समुदाय, जिसमें ‘लेस्बियन’, ‘गे’, ‘बाइसेक्सुअल’ सभी शामिल हैं, के लिए भी किया जाता है। आपने अक़्सर सुना होगा ‘गे कम्यूनिटी’ या ‘गे पीपल’.

B – ‘बाईसेक्सुअल’: जब किसी मर्द या औरत को मर्द और औरत दोनों से ही प्यार हो तो उन्हें ‘बाईसेक्सुअल’ कहते हैं। यानी एक मर्द ‘बाईसेक्सुअल’ हो सकता है और एक औरत भी। दरअसल एक इंसान की शारीरिक चाहत तय करती है कि वो L, G, B है। वहीं एक व्यक्ति का शरीर, यानी उनके जननांग तय करते हैं कि वो T, I, Q है।

T – ‘ट्रांसजेंडर’: वो इंसान जिनका शरीर पैदा होने के व़क्त कुछ और था और जब वो बड़े होकर खुद को समझे तो एकदम उलट महसूस करने लगे। मसलन, पैदा होने के व़क्त बच्चे के निजी अंग पुरुषों के थे और उसे लड़का माना गया. पर समय के साथ उसने खुद को समझा और पाया कि वो तो लड़की जैसा महसूस करते हैं, यानी वो ‘ट्रांसजेंडर’ हैं। उसी तरह से पैदा होने के व़क्त बच्चे के निजी अंग औरतों के थे और उसे लड़की माना गया पर समय के साथ जब उसने खुद को समझा और पाया कि वो तो लड़का जैसा महसूस करते हैं, तो वो ‘ट्रांसजेंडर’ हैं।

कुछ ‘ट्रांसजेंडर’ अपने मन की पहचान के हिसाब से अपना पहनावा बदल लेते हैं। उन्हें ‘क्रॉस-ड्रेसर’ भी कहा जाता है। जो ‘ट्रांसजेंडर’ इसके लिए अपने शरीर में दवाओं और ऑपरेशन, जैसे ‘हॉर्मोन रिप्सेलमेंट थेरेपी’ और ‘सेक्स रीएसाइनमेंट सर्जरी’, के ज़रिए बदलाव करवाते हैं, उन्हें ‘ट्रांससेक्सुअल’ कहा जाता है। एक ‘ट्रांसजेंडर’ व्यक्ति अगर आदमी या औरत से ही प्यार करे तो सिर्फ़ ‘ट्रांसजेंडर’ कहलाता है। पर अगर वो समलैंगिक चाहत रखें तो उसके मुताबिक वो ‘लेस्बियन ट्रांसजेंडर’, ‘गे ट्रांसजेंडर’ या ‘बाईसेक्सुल ट्रांसजेंडर’ हो सकते हैं।

 

वैसे ट्रांसजेंडर, क्रॉस-ड्रेसर, ट्रांससेक्सुअल, ये सब पश्चिमी शब्द हैं। भारत में ट्रांसजेंडर्स को हिजड़ा कह कर ही बुलाया जाता है। हिजड़ा एक ख़ास समुदाय का नाम है. जिनके अपने कायदे-तौर-तरीके और परिवार की तरह एक-दूसरे का ख़्याल रखने की सभ्यता जुड़े हैं। हिजड़ा, अरावनी, कोथी, शिव-शक्ति और जोग्ती हिजड़ा – ये देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे ऐसे समुदायों के स्थानीय नाम हैं।

I – ‘इंटर-सेक्स’: पैदाइश के व़क्त जिस व्यक्ति के निजी अंगों से ये साफ़ नहीं होता कि वो पुरुष हैं या औरत, उन्हें ‘इंटर-सेक्स’ कहते हैं। डॉक्टर को उस व़क्त जो सही लगता है उस बच्चे को उसी लिंग का मान लिया जाता है और वैसे ही बड़ा किया जाता है। बड़े होने के बाद जब उस इंसान को समझ में आ जाए कि वो कैसा महसूस करता है, वो खुद को आदमी, औरत या ‘ट्रांसजेंडर’, कुछ भी मान सकता है।

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साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फ़ैसले में ‘ट्रांसजेंडर्स’ को तीसरे लिंग की पहचान दी जिसके तहत उन्हें नौकरियों, शिक्षा वगैरह में आरक्षण दिए जाने की सिफारिश की। इस फ़ैसले के मुताबिक ‘थर्ड जेंडर’ यानी तीसरे लिंग में ‘ट्रांसजेंडर’, ‘ट्रांससेक्सुअल’, ‘क्रॉस-ड्रेसर’ और ‘इंटर-सेक्स’, ये सभी शामिल हैं।

Q – ‘क्वीयर’: जो इंसान ना अपनी पहचान तय कर पाए हैं ना ही शारीरिक चाहत, यानी जो ना खुद को आदमी, औरत या ‘ट्रांसजेंडर’ मानते हैं और ना ही ‘लेस्बियन’, ‘गे’ या ‘बाईसेक्सुअल’, उन्हें ‘क्वीयर’ कहते हैं। ‘क्वीयर’ के ‘Q’ को ‘क्वेश्चनिंग’ भी समझा जाता है यानी वो जिनके मन में अपनी पहचान और शारीरिक चाहत पर अभी भी बहुत सवाल हैं।

साभार: BBC HINDI

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