लोकसभा में मोदी ने राहुल के ‘भूकंप’ और मान के ‘पीने’ पर दिए बयान

नई दिल्‍ली। पीएम मोदी ने लोकसभा में राष्‍ट्रपति प्रणब मखर्जी के अभिाभाषण पर बहस में हिस्‍सा लिया। लोकसभा में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए राहुल गांधी को निशाने पर लिया। उन्‍होंने अपने भाषण की शुरुआत भूकंप को लेकर की। पीएम मोदी ने कहा कि बहुत दिनों से सुन रहा था कि भूकंप आएगा और सोमवार रात भूकंप आ ही गया।

लोकसभा में पीएम मोदी

लोकसभा में पीएम मोदी ने दिया बड़ा बयान

लोकसभा में पीएम मोदी ने विपक्ष के नेता खड़गे को भी आड़े हाथ लिया। उन्‍होंने खड़गे के बयान पर कहा कि आज अगर कांग्रेस बची है तो सिर्फ लोकतंत्र की वजह से। इसलिए लोकतंत्र का धन्‍यवाद करना चाहिए। पीएम मोदी ने लोकसभा में तमाम मुद्दों पर बयान दिए।

पीएम मोदी ने राष्‍ट्रपति का व्‍यक्‍त किया आभार

पीएम मोदी ने इसके बाद राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी का आभार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि मैं उनको धन्‍यवाद देना चाहता हूं। पीएम ने कहा कि देश की देश की जनशक्ति का सामर्थ क्या है, गांव गरीब किसान की जिंदगी, किस प्रकार से बदल रही है, उसका एक विस्तार खांका सदन में रखा था। इस चर्चा में कई महानुभावों ने चर्चा को प्राणवान बनाया। मैं चर्चा में शरीक होने वाले सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करता हूं।

पीएम मोदी ने भूकंप और राहुल का बताया रिश्‍ता

पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा कि सोमवार रात आखिरकार भूकंप आ ही गया। बहुत दिनों से सुन रहा था कि भूकंप आएगा। इससे पहले धमकी भी बहुत सुनी थी। किसी वजह से मां धरती भी रूठ गईं।

भूकंप का क्‍या कारण

पीएम मोदी ने मैं सोच रहा था कि आखिर भूकंप आया क्यूं, जब कोई स्कैम में भी सेवा का भाव देखता है, नम्रता का भाव देखता है, सिर्फ मां ही नहीं धरती मां भी दुखी हो जाती है तब जाकर भूकंप आता है।

कांग्रेस को सुनाई खरी-खरी

कोई भी व्यवस्था हो लोकतांत्रिक हो चाहे कुछ भी, जनशक्ति का मिजाज कुछ और ही होता है। खड़गे कह रहे थे कि कांग्रेस की कृपा है कि आप पीएम बन पाए। वाह क्या शेर सुनाया, बहुत बड़ी कृपा की। आपने लोकतंत्र बचाया, लेकिन उस पार्टी के लोकतंत्र को देश भलिभांति जानता है। पूरा लोकतंत्र एक परिवार के नाम कर दिया गया ह।  सन 1975 में देश पर आपातकाल थ्‍ज्ञोप दिया गया था। लाखों को जेल की सलाखों में बंद कर दिया गया था।  अखबारों पर ताले लगा दिए गए थे उन्हें अंदाज नहीं था कि जनशक्ति क्या होती है। उसी लोकतंत्र और जनशक्ति की ताकत है कि गरीब मां का बेटा भी इस देश का पीएम बन सकता है।

उस समय भी कमल था और आज भी कमल है

लोकसभा में पीएम मोदी ने सख्‍त तेवर अपनाते हुए कहा कि हमारी संस्‍कृति कुत्तों वाली नहीं है। जब कांग्रेस पार्टी का जन्म भी नहीं हुआ था, 1857 का संग्राम, इस देश के लोगों ने जान की बाजी लगाकर लड़ा था। सबने मिलकर लड़ा था।  संप्रदाय की भेद रेखा नहीं थी, तब भी कमल था, आज भी कमल है।

समस्‍या है कि आजादी को सिर्फ एक परिवार से जोड़ा गया

लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा कि अब तक जितनी भी सरकारें आईं उनके प्रधानमंत्री का कुछ न कुछ जरूर योगदान था। पर विपक्ष को लगता है कि आजादी सिर्फ एक परिवार ने दिलाई, समस्या की जड़ वहां है। हम देश को पूर्णता में स्वीकार करें। इसलिए जनशक्ति को जोड़कर कोई इंसान, कोई मंत्र नहीं होता है जो कुछ कर न सके। जरूरत होती है योजक। इस सरकार ने हर शक्ति को संवार कर जोड़ने का प्रयास किया है।

स्वच्छता पर रहा सरकार का मुख्‍य फोकस

पीएम मोदी ने विपक्ष पर स्‍वच्‍छता को लेकर भी हमला बोला। उन्‍होंने कहा कि क्‍या कभी संसद में स्वच्छता विषय पर चर्चा भी हुई है। पहली बार ये सरकार आने के बाद, क्या स्वच्छता को भी राजनीतिक एजेंडा बनाएंगे? आपके इलाके में, कोई भी गंदगी नहीं चाहता है। क्या हम एक स्वर में इस गांधी जी के सपने को पूरा करने के लिए आगे नहीं बढ़ सकते।

बजट जल्‍दी पेश करने पर भी विपक्ष को

भारत एक कृषि प्रधान देश है। पूरा कारोबार कृषि पर है। दिवाली तक पता चल जाता है। अंग्रेज छोड़कर आए हैं, वही परंपरा आगे लेकर चल रहे हैं। मई तक बजट का पालन होता है, फिर तीन महीना बारिश होता है, कोई काम नहीं होता है। फिर दिसंबर से काम होता है और मार्च तक सिर्फ बिल कटते थे। आखिर क्या कारण था कि बजट 5 बजे आता था? किसी ने नहीं सोचा था। किसी ने नहीं सोचा, वहां यूके में 11 बजे यहां शाम के पांच बजे होता है. अटल जी की सरकार आई, तब समय बदला गया।

रेलवे बजट खुश करने के लिए आता था

रेलवे के संबंध में बजट में विस्तार से चर्चा होगी। कभी रेलवे ही परिवहन की धारा था। आज रेलवे के अलावा और कई परिवहन आगे आ गए। हम इसे कम्प्रेहेंसिव लाना चाहते थे। पहले बजट में हमने बताया था कि रेलवे को लेकर 1500 घोषणाएं हुई थीं, खुश करने के लिए रेलवे बजट बनाए जाते थे। ये ऐसी चीजें थी जिनका कागज पर ही मोक्ष हो गया था। हम जानते हैं कि इसका राजनीतिक दृश्य से नुकसान होता है, मुझे ऐसी गाड़ी नहीं चलानी है. मुझे फैसले लेने है, अच्छे फैसले लेने हैं।

नोटबंदी पर चर्चा के लिए तैयार थे, विपक्ष टीवी पर बाइट देता रहा

पहले दिन से सरकार कह रही थी कि नोटबंदी पर चर्चा के लिए तैयार हैं पर आपको लग रहा था कि टीवी पर कतार, मोदी इसका फायदा उठा ले जाएगा। उस वक्त केवल टीवी बाइट देने में मजा आता था। कितना बड़ा बदलाव आया है। जो बारीकी से चीजों का अध्ययन करते हैं, उनका ध्यान जाए। 2014 के पहले का वक्त देख लीजिए, वहां से आवाज उठती थी, कोयले में कितना खाया, टू-जी में कितना गया, जल, वायु करप्शन में कितना गया, कितने लाख, कितने करोड़ गए। अब वहां से आवाज आती है कि मोदी जी कितना लाए, कितना लाए। ये मेरे लिए खुशी की खबर है। यही तो सही कदम है, ये मेरे लिए संतोष की बात है. इससे बड़ा जिंदगी में संतोष क्या है।

26 साल तक कानून को नोटिफाइ नहीं किया? क्यों

खड़गे जी कहते हैं कि काला धन, सोने, प्रॉपर्टी, हीरे में है, सदन जानना चाहता है कि ये ज्ञान कब हुआ आपको? ये कोई इनकार नहीं कर सकता कि करप्शन कि शुरूआत नगद से होती है। आपको मालूम है कि यही बुराइयों के केंद्र में है। 1988 में जब राजीव गांधी जी पीएम थे, दोनों सदन में बहुमत था। पंचायत से पार्लियामेंट तक सबकुछ आपके कब्जे में था। तो आपाने बेनामी संपत्ति का कानून बनाया, आपको जो ज्ञान हुआ क्या कारण था कि 26 साल तक कानून को नोटिफाइ नहीं किया?

हमें देश की चिंता है

लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा कि इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि समांनांतर अर्थव्यवस्था डेवलप हुई थी। ये विषय आपकी सरकार को पता था। जब इंदिरा जी राज करती थीं तो यशवंत चव्हाण ये बात लेकर गए थे, तो उन्होंने कहा था कि कांग्रेस को चुनाव नहीं लड़ने क्या? हमें चुनाव नहीं देश की चिंता है। जब तक गहरी चोट नहीं लगाओगे, नहीं बदलेगा। कुछ दलों के दिमाग में चारवाक का मंत्र घर कर गया है।  मरने के बाद क्या देखा है, ये तो चारवा को ज्ञान है।

भगवंत मान का उड़ाया मजाक

यावत जीवत, सुखम जीवत। वे कहते थे कि जब तक जिओ, मौज करो। कर्ज लो। घी पियो। उस जमाने में घी पीने का था इसलिए घी कहा। भगवंत मान, इस वक्त कुछ और पीने के लिए कहते। मान पर संसद में शराब पीकर आने का आरोप लग चुका है।

अर्थव्यवस्था मजबूत थी, इसलिए किया नोटबंदी का ऑपरेशन

जब तक शरीर स्वस्थ्य नहीं होती है तब तक डॉक्टर ऑपरेशन नहीं करता है। नोटबंदी के लिए ये समय करना उचित था। अर्थव्यवस्था मजबूत थी, इसलिए हो पाया। हमारे देश में सालभर में जितना व्यपारा होता है, उतना दिवाली के दिन हो जाता है। दिवाली के आसपास कारोबार पिक पर पहुंच जाता है। दुकानदार भी 15-15 दिन बाहर चले जाते हैं मैंने जो हिसाब किताब कहा था, उसी प्रकार से गाड़ी चल रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button