अतिपिछड़ों को शाह-मोदी ने किया निराश

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लखनऊ। राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव चौधरी लौटनराम निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के इशारे पर अमित शाह व नरेंद्र मोदी की जोड़ी ने बड़ी सफाई से अतिपिछड़ों की अपेक्षाओं व आशाओं पर पानी फेर दिया।

लौटनराम निषाद

लौटनराम निषाद ने कहा- अतिपिछड़े अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं

निषाद ने कहा कि अतिपिछड़े व अतिदलित वर्ग ने राजनीतिक परिवर्तन व अतिपिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री बनाए जाने की भावना से झांसे में आकर भाजपा के पक्ष में मतदान किया। अतिपिछड़ों की बदौलत ही यूपी में भाजपा का वनवास खत्म हुआ है, लेकिन अतिपिछड़े अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। भाजपाइयों ने अतिपिछड़ों के मध्य यह प्रायोजित हवा फैलाया कि इस बार अतिपिछड़ा ही उप्र का मुख्यमंत्री बनेगा।

उन्होंने कहा कि अतिपिछड़ों को यह विश्वास था कि भाजपा सरकार बनने पर उमा भारती, स्वतंत्र देव सिंह, निरंजन ज्योति निषाद, केशव प्रसाद मौर्य, धर्मपाल सिंह में से कोई मुख्यमंत्री बनेगा।

लौटनराम निषाद ने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य के समर्पण व निर्णय से अतिपिछड़ों को बहुत बड़ा झटका लगा है और उनकी आशाओं पर मौर्य ने पानी फेर दिया है।

मौर्य द्वारा उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार करने को गलत करार देते हुए निषाद ने कहा कि इन्हें इस पद को अस्वीकार कर देना चाहिए था। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का पद डिप्टी सीएम से महत्वपूर्ण होता है।

उन्होंने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य कृष्ण के समान रणछोर साबित हुए हैं। आरएसएस ने महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के बाद उत्तर प्रदेश में भी अतिपिछड़ों को ठगा है। लोकसभा चुनाव-2019 में अब अतिपिछड़े भाजपा की ‘शातिर चाल’ में नहीं फंसेंगे।

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