विकीलीक्‍स खुलासा : मुम्बई हमले के सबूतों को अमेरिका ने किया खारिज

मुम्बई हमले को लेकर भारत द्वारा दिये गये सबूतों को अमेरिका ने खारिज कर दिया है यह बात पठानकोट हमले के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो जाती है कि हमारे मित्र देश हमारे द्वारा दिये गये सबूतों पर क्या और कैसा रियेक्ट करते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की गोपनीय पत्रावलियों का हवाला देते हुए विकीलीक्स कहता है कि मुम्बई हमलों को लेकर पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत एनी डब्ल्यू पैटरसन ने साफ लिखा है कि भारत ने पाक समर्थित लश्कर ए तय्यबा के प्रमुख नेताओं के खिलाफ अपर्याप्त सबूत दिये हैं।

मुम्बई

विकीलीक्‍स खुलासा बताता है कि कई कड़ि‍यां मैच नहीं करती

पैटरसन ने कहा है कि संघीय जांच एजेंसी एफआईए और दूसरे जांचकर्ताओं ने लश्कर के जकी उर रहमान लखवी, जरार शाह और मजहर इकबाल अलकामा के खिलाफ अभियोजन के लिए सबूतों को अपर्याप्त पाया है। विकीलीक्स के अनुसार पैटरसन ने यह भी कहा है कि राजनीतिक दबाव के चलते एफआईए मजबूर है कि बिना ठोस सबूतों के लश्कर के इन तीनों नेताओं को गिरफ्तार कर आरोप निर्धारित कर औपचारिक मुकदमा शुरू करे।

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विकीलीक्स के अनुसार कुछ ऐसे ही संदेश भारत स्थित अमेरिकी दूतावास से भी भेजे गये जिनमें मुम्बई हमले के मामले में भारत द्वारा दिये गये सबूतों पर संदेह जताया गया। जियॉफ पायट ने ने वाशिंगटन को लिखा कि भारतीय अधिकारी इस बारे में आश्वस्त हैं कि 11 जुलाई के मुम्बई हमलों के पीछे पाकिस्तान है औऱ चिंतित हैं कि अमेरिका ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के विरूद्ध ठोस साक्ष्यों का बहुत कड़ा मानक बनाया है।

विकीलीक्स ने यह भी उल्लेख किया कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायण स्वीकार करते हैं कि इसमें बीच की कुछ कड़ियां अभी नहीं जुड़ पायी हैं। उन्हें यह कहने में संकोच है कि साक्ष्य पूर्ण हैं लेकिन वह इन्हें पर्याप्त बताते हैं। नारायणन इस मान्य धारणा का लाभ उठाना चाहते हैं कि पाकिस्तान पर हमलों का आरोप है जबकि आलोचनाओं के जवाब में जांच के बारे में विदेश सचिव और मुम्बई पुलिस के बयान ठोस सबूतों का समर्थन नहीं करते।

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