विज्ञान और गणित में बच्चे अब किसी को भी दे सकते हैं मात

0

उत्तरकाशी। शूरवीर सिंह खरोला पेशे से एक अध्यापक हैं, जिनके लिए अध्यापन प्रोफेशन नहीं जुनून है। शूरवीर उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से तीस किलोमीटर दूर गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित जूनियर हाईस्कूल लाटा में विज्ञान और गणित पढ़ाते हैं। दूर-दूर गांव के बच्चे यहां पढ़ने आते  हैं। 59 साल के शिक्षक शूरवीर सिंह खरोला की वर्ष 1981 में नौकरी लगी। 1982 में उनकी तैनाती जूनियर हाईस्कूल संगलाई उत्तरकाशी में हुई तो विषय मिले विज्ञान और गणित।

विज्ञान

दूर-दूर गांव के बच्चे यहां आते हैं पढ़ने

जहां एक तरफ हम सबकी सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर धारणा अच्छी नहीं है, वहीं अगर आप उत्तरकाशी के इस जूनियर हाईस्कूल में जायेंगे तो पक्का आपकी धारणा बदल जाएगी क्योंकि यहां विज्ञान और गणित की पढ़ाई के लिए दूर-दूर के गांवों से बच्चे यहां आते हैं। इतना ही नहीं यहां कक्षा छह से आठवीं तक में पढ़ रहे कुल 55 छात्र-छात्राएं हैं। इन दो विषयों में करीब 40 बच्चों के अंक या तो 60 फीसद हैं या इससे अधिक हैं।

विज्ञान और गणित समझाने के लिए मॉडल व चार्ट का करते हैं इस्तेमाल

खरोला की खासियत है कि जब भी वो विज्ञान पढ़ाते हैं तो इंद्रधनुष को समझाने के लिए फव्वारे को मॉडल की तरह उपयोग करते हैं और गणित की कक्षा के लिए बाकायदा चार्ट का इस्तेमाल होता है। इतना ही नहीं, अगर यहां किसी भी बच्चे से पूछेंगे कि इंद्रधनुष कैसे बनता है, तो जवाब में फौरन बच्चे आपको फुलवारी के पास ले जायेंगे  और धूप में सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने वाला फुव्वारा चलाते हुए प्रकाश के नियम गिना देंगे। जब शूरवीर से पूछा गया कि वो यह सब क्यों करते हैं तो उन्होंने बताया कि बच्चे अक्सर विज्ञान और गणित से बचते थे। इसलिए बस बच्चों में दोनों विषयों के प्रति रुचि जगाने की ठानी और शुरू हुआ प्रयोगों का दौर।

loading...
शेयर करें