किसानों की मौत के बीच विधायकों की सैलरी में 400% का इजाफा

0

तेलंगाना। तेलंगाना में एक ओर किसान खुदकुशी करने पर मजबूर हैं तो दूसरी ओर सरकार ने विधान परिषद सदस्यों और विधायकों की सैलरी 400 फीसदी बढ़ा दी है। इतना ही नहीं सरकार ने तय किया है कि विधायकों और विधान परिषद सदस्यों को मुफ्त में एप्पल के आईफोन और आईपैड दिया जाएगा। मंगलवार को राज्य के दोनों सदनों में यह प्रस्ताव पास हो गया। विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के लिए एक और खुशखबरी है। वित्त मंत्री इतेला राजेंद्र ने सभी सदस्यों को मंगलवार रात एक राजशाही भोजन के लिए निमंत्रण भेजा है।

विधायकों की सैलरी

इन सदस्यों के लिए एक और सुविधा रखी गई है। अगर उन्हें एप्पल के आईपैड या आईफोन नहीं चाहिए तो इसके बदले वह एक गिफ्ट कूपन हासिल कर सकते हैं। वित्त मंत्रालय यह कूपन मुहैया कराएगा। इसके जरिए इन सदस्यों को डेढ़ करोड़ रुपए तक की शॉपिंग करने का मौका मिलेगा।

अगर आपको लग रहा है कि तेलंगाना के 120 विधायकों और 40 विधान परिषद सदस्यों को छप्पर फाड़ के मिला है तो रुकिए…! सदन में इससे पहले भी एक बिल पास हो चुका है, जिसके मुताबिक इन सदस्यों को हैदराबाद में एक-एक आ‍लीशान मकान भी मिलेगा। हालांकि इसके पीछे वजह बताई गई थी कि सभी सदस्य अपने क्षेत्रों में रहते हैं, इसलिए हैदराबाद में भी उनके लिए एक आशियाने की जरूरत है।

मंगलवार की सुबह तेलंगाना विधानसभा में इस बिल के पास होने के बाद अब विधायकों और विधानसभा सदस्यों की बल्ले-बल्ले होनी तय है। सदस्यों की सैलरी 400 फीसदी बढ़ने से सरकार के खजाने पर 42.67 करोड़ का बोझ पड़ेगा। एक सच यह भी है कि यह रकम तेलंगाना के उसी आम आदमी की जेब से जाएगी, जो गरीबी के कारण मरने के लिए मजबूर है।

विधायकों की सैलरी पर एक नजर

आंध्र प्रदेश में 95 हजार रुपए सैलरी बढ़ाकर दो लाख रुपए करने की बात चल रही है।
हरियाणा में विधायकों की सैलरी 1 लाख 25 हजार रुपए है।
तमिलनाडु में हर विधायक को 55 हजार रुपए महीना मिल रहा है।
दिल्ली के विधायक भी अमीर हैं। सैलरी 2 लाख 10 हजार रुपए।
गुजरात इस मामले में पीछे है। हर विधायक को 40 हजार रुपए ही मिलते हैं।
पश्चिम बंगाल में तो विधायकों की सैलरी 10 हजार रुपए है।
यह भी जान लें कि सांसदों की सैलरी 1 लाख 30 हजार रुपए मासिक होती है। इसके अलावा कई तरह के भत्ते भी मिलते हैं। यानी कई राज्यों के विधायकों की सैलरी अब सांसदों के बराबर होगी।

तेलंगाना का इतिहास

तेलंगाना आन्ध्र प्रदेश से अलग होकर बना भारत का 29वां राज्य है। हैदराबाद को दस साल के लिए तेलंगाना की राजधानी और आंध्र प्रदेश की संयुक्त राजधानी बनाया जाएगा। तेलंगाना, हैदराबाद के तेलुगूभाषी क्षेत्रों से मिलकर बना है। ‘तेलंगाना’ शब्द का अर्थ है – ‘तेलुगूभाषियों की भूमि’। यहां के मुख्यमंत्री कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख हैं। के चंद्रशेखर राव अलग तेलंगाना राष्ट्र आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता भी रहे हैं। वे तेलंगाना के मेदक जिले के गजवेल विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उन्होंने दो जून 2014 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके पूर्व वे सिद्धिपेट से विधायक तथा महबूबनगर और करीमनगर से सांसद रह चुके हैं। वे केंद्र में श्रम और नियोजन मंत्री रह चुके हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति के गठन से पहले वे तेलुगु देशम पार्टी के सदस्य थे। उन्होंने अलग तेलंगाना राज्य के निर्माण की मांग करते हुए तेलगू देशम पार्टी छोड़ी। तेलंगाना राष्ट्र समिति 2004 कांग्रेस के साथ 2004 में लोकसभा चुनाव लड़ी थी और उसे पांच सीटें मिली। जून 2009 तक वेसंप्रग सरकार में थे, लेकिन अलग तेलंगाना राष्ट्र पर संप्रग के नकारात्मक रवैये के कारण उन्हें संप्रग से बाहर आ गए।

loading...
शेयर करें