रामू की पिछली फिल्मों जैसी ही है ‘वीरप्पन’

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फिल्म का नाम: वीरप्पन
डायरेक्टर: रामगोपाल वर्मा
स्टार कास्ट: संदीप भरद्वाज, उषा जाधव, सचिन जोशी, लीजा रे
रेटिंग: 2  स्टार

वीरप्पन

वीरप्पन फिल्म रिव्यू

बोयोपिक के चल रहे ट्रेंड को फॉलो करते हुए रामगोपाल वर्मा ने भी एक बायोपिक फिल्म ‘वीरप्पन’ बनाई है। फिल्म भारत के सबसे बड़े डाकू वीरप्पन की जिंदगी पर बेस्ड है। रामगोपाल वर्मा लंबे अर्से बाद इस फिल्म से वापसी कर रहे हैं।साउथ में सुपर हिट हो जाने के बाद रामगोपाल वर्मा ने अब हिंदी में भी ‘वीरप्पन’ फिल्म बनाई है। आईये फिल्म की समीक्षा करते हैं।

कहानी

फिल्म की कहानी भारत के सबसे बड़े डाकू वीरप्पन की है। साउथ में कर्नाटक और तमिलनाडु के बॉर्डर पर बेस्ड घने जंगल में रहने वाले डाकू ‘वीरप्पन’ (संदीप भारद्वाज) अपने खूंखार मिजाज की वजह से काफी फेमस हो चुका था। 2004 में एसटीएफ ने कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा से लगे जंगल में मुठभेड़ के दौरान चंदन तस्कर वीरप्पन को मार गिराया था। वीरप्पन को मारने में सरकार को 20 साल लग लए थे। इस दौरान वीरप्पन ने हजारों जानें ली, साथ ही हाथियों के दांत का अवैध व्यापार भी करता रहा। फिल्म में वीरप्पन की पत्नी मुत्तुलक्ष्मी और एक शहीद पुलिस अफसर की वाइफ प्रिया (लीजा रे) के बीच भी कई सारे सीक्वेंस दिखाये गए हैं जो इस ऑपरेशन को और भी रोमांचक बनाते हैं।

डायरेक्शन

रंगीला, शूल जैसी फिल्मों को डायरेक्ट कर चुके रामगोपाल वर्मा ने अपने स्टाइल में फिल्म का डायरेक्शन किया है।लाउड बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ-साथ कहानी किसी भी तरफ घूमती जाती है। बिना डायलॉग्स के लंबे-लंबे शॉट्स, बहुत ज्यादा खून खराबा, ये सब कुछ देखने को मिलता है। कभी कैमरा, कार की स्टीयरिंग से, तो कभी कुर्सी के नीचे से शूट करता है। इंटरवल से पहले कहानी इधर उधर भटकती रहती है लेकिन लास्ट के 25-30 मिनट दिलचस्प है। फर्स्ट हाफ को और भी ज्यादा बेहतर बनाया जा सकता था।

एक्टिंग

संदीप भारद्वाज ने वीरप्पन की जबरदस्त एक्टिंग की है। संदीप भारद्वाज को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ‘वीरप्पन’ कितना खूंखार डाकू हुआ करता था। उषा जाधव वीरप्पन की पत्नी के रोल में उम्दा लगी हैं। फिल्म में सचिन जोशी और लीजा रे के कनेक्शन को समझने में ज़रा दिक्कत होगी। इनका रोल किसी और ने किया होता को शायद लो इसे और बेहतर हो सकता था।

म्यूजिक

प्रोमोशनल सॉन्ग ‘खल्लास’ फिल्म में नहीं है कई बार टुकड़ों टुकड़ों में सुनाई देता है।  बैकग्राउंड म्यूजिक भी आपको एक वक्त के बाद परेशान करने लगता है क्योंकि वो काफी लाउड है।

देखें या नहीं

वीरप्पन के बारे में जानने की दिलचस्पी हैं तो फिल्म देखने जा सकते हैं वरना टीवी पर आने का इंतजार बड़े आराम से किया सकता है।

 

 

 

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