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शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के साथ ये कैसा भेदभाव

शनि शिंगणापुरपुणे। शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर मचा घमासान शांत होने का नाम नहीं ले रहा। एक तरफ जहां प्रदर्शनकारी महिलाओं की मांग है कि वे मंदिर के चबूतरे पर जाकर शनि भगवान की पूजा अर्चना करेंगी तो वहीं दूसरी ओर मंदिर ट्रस्‍ट के साथ पुलिस ने करीब सौ महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने से रोक रखा है। इस बीच इस विवाद को सुलझाने के लिए महाराष्‍ट्र सरकार को भी बीच में कूदना पड़ा है। सरकार ने अहमदनगर जिला प्रशासन को बातचीत कराकर जल्‍द मामला सुलझाने के निर्देश दिए हैं। शनि शिंगणापुर में कई सौ सालों से मंदिर के चबूतरे पर महिलाओं के प्रवेश पर रोक की एक परंपरा चली आ रही है।

शनि शिंगणापुर में पूजा को लेकर भेदभाव

शनि शिंगणापुर मंदिर में पूजा करने की जिद पर अड़ी महिलाओं ने मंगलवार सुबह आंदोलन तेज कर दिया था। सैंकड़ों की संख्या में महिलाए धार्मिक स्थल के लिए रवाना हुईं लेकिन मंदिर से करीब 80 किलोमीटर पहले ही उन्हें रोक लिया गया। इससे नाराज महिलाओं और सुरक्षाबलों के बीच झड़प भी हुई जिसके बाद प्रशासन ने करीब 350 महिलाओं को हिरासत में ले लिया। हालांकि कुछ देर बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। भूमाता रन रागिनी ब्रिगेड की करीब 25 महिलाएं अभी भी हिरासत में हैं।

सूत्रों के मुताबिक, महिलाएं सड़क पर लेटकर प्रदर्शन कर रही थीं। सुरक्षाबलों से झड़प के बाद करीब 350 महिलाओं को हिरासत में ले लिया गया। बाद में भूमाता ब्रिगेड की 25 महिला कार्यकर्ताओं को छोड़कर बाकी सभी को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया है। साथ ही सभी को चेतावनी भी दी गई है कि मंदिर में घुसने के लिए हो रहे प्रदर्शनों से दूर रहें।

…जब टूटी थी 400 साल पुरानी परंपरा

किसी भी हिंसक टकराव को रोकने के लिए अहमदनगर जिले में पुलिस ने ऐहतियातन भीड़ जमा न होने देने के निर्देश दिए हैं। मुंबई से करीब तीन सौ किलोमीटर दूर शनि शिंगणापुर मंदिर में महिला श्रद्धालु के दर्शन के बाद से विवाद शुरू है। एक युवती ने 400 साल पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए शनि की मूर्ति पर तेल चढ़ा दिया था। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने महिला को रोकने के लिए महिला पुलिस को तैयार किया था।

प्रदर्शनकारी महिलाओं की धमकी

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को धमकी दी कि वह तब तक सुपा गांव नहीं छोड़ेंगी जब तक कि उन्हें भगवान शनि की पूजा करने की इजाजत नहीं दी जाती। वहीं दिनभर चले हंगामे के बाद शाम को मंदिर में आरती शुरू हुई। मंदिर के चारों ओर सुरक्षाबलों का कड़ा पहरा है। आने-जाने वाले हर व्यक्ति पर नजर रखी जा रही है।

मंदिर ट्रस्ट का क्‍या है कहना

इस पूरे विवाद पर मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों का कहना है कि वे महिलाओं का सम्‍मान करते हैं। उस महिला और उसकी भावना का भी सम्‍मान करते हैं जिसने वहां जाकर पूजा की। लेकिन, पुरानी परंपरा के अनुसार वहां महिलाएं जाकर पूजा नहीं कर सकती और हम इसे बदल नहीं सकते।

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