शनि शिंगणापुर विवाद : अब पुरुष भी चबूतरे पर चढ़कर नहीं करेंगे पूजा

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शनि शिंगणापुर विवादनई दिल्ली। शनि शिंगणापुर विवाद अब और भी ज्यादा गंभीर हो गया है। यह विवाद रविवार को हुई बातचीत के बाद और भी ज्‍यादा बढ़ गया। श्रीश्री रविशंकर के साथ शिंगणापुर ट्रस्ट और भूमाता ब्रिगेड की मुलाकात के बाद फैसला लिया गया कि महिलाओं के साथ-साथ अब पुरुष भी मंदिर के चबुतरे पर नहीं जाएंगे। श्रीश्री रविशंकर ने इस फैसले के बाद शनि शिंगणापुर विवाद सुलझने का दावा किया है। वहीं भूमाता ब्रिगेड ने इस बैठक को बेनतीजा घोषित कर दिया है।

शनि शिंगणापुर विवाद नया मोड़

भूमाता ब्रिगेड की नेता तृप्ति देसाई ने कहा कि हमारी मांग महिलाओं को चबूतरे पर चढ़कर पूजा करने की इजाजत को लेकर थी। इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई। जबकि बातचीत के बाद यह कहा गया कि अब सभी बाहर से ही दर्शन करेंगे। वहीं श्रीश्री ने कहा कि शनि शिंगणापुर विवाद खत्‍म हो गया है। आपसी सहमति बन गई है कि अब पुरुष और महिलाएं दोनों ही चबूतरे पर नहीं चढ़ेंगे। सिर्फ पुजारी द्वारा ही पवित्र चबूतरे पर चढ़कर पूजा अर्चना की जाएगी। वहीं अब शिला पर तेल भी मशीन के द्वारा चढ़ाया जाएगा। हालांकि 11 हजार रुपए देकर चबूतरे पर चढ़ने की व्यवस्था वैसे ही कायम रहेगी

श्रीश्री रविशंकर ने आगे कहा कि यह निर्णय इसलिए किया है कि शिला पर अधि‍क तेल चढ़ाने के कारण फिसलन हो जाती है और वहां खतनाक स्थिति बन जाती है। पूर्व में कई ऐसी दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनको देखते हुए यह निर्णय किया गया है। श्रीश्री ने बताया‍ कि इस नई व्यवस्था पर सभी पक्ष राजी हो गए हैं। उन्होंने कहा, ‘दो मॉडल हैं एक काशी विश्वनाथ और दूसरा बालाजी मंदिर। सभी बराबर हैं, सभी को मंदिर में प्रवेश का समान अधि‍कार है।’

उन्होंने बताया कि जहां तक महिला पुजारी की बात है तो जब वह इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं हो जाती हैं, उन्हें चबूतरे पर चढ़ने की इजाजत नहीं है। लेकिन जब महिला पुजारी पूरी तरह प्रशिक्षित और तैयार हो जाएंगी इस विषय पर भी विचार किया जाएगा। श्रीश्री ने बताया कि इस मसले पर भूमाता बिग्रेड की तृत्पि‍ देसाई से भी बात हुई है।

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