आज रात चांद से होगी अमृत की बारिश

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देहरादून। आज शरद पूर्णिमा का चांद 16 कलाओं से परिपूर्ण होगा। इस दिन पूरा चांद दिखता है। इसलिए इसे महापूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन चांद से अमृत टपकता है।

शरद पूर्णिमा

सुख-समृद्धि के लिए किया जाती है शरद पूर्णिमा पर चांद की पूजा

शरद पूर्णिमा का व्रत संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। माना जाता है कि इस रात्रि में चंद्रमा की किरणों से अमृत टपकता है।

मां लक्ष्मी की पूजा करने से मिलता है विशेष फल

ज्योतिषाचार्य पंडित शक्तिधर शास्त्री के मुताबिक पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। बताया कि शरद पूर्णिमा को ब्रह्ममुहूर्त में उठें और स्नान करने के बाद गाय के दूध से बनी खीर, घी तथा चीनी मिलाकर पूरियां बनाएं और अर्द्धरात्रि के समय भगवान का भोग लगाएं। इसके बाद कथा सुनें।

इन चीजों को चांदनी में रखें

इसके बाद लोटे में जल तथा गिलास में गेहूं, दोने में रोली तथा चावल रखकर कलश की वंदना करके दक्षिणा चढ़ाएं। साथ ही जिस लोटे में जल है उसे चंद्रमा को जल चढ़ाएं। इसके बाद खीर का भोग लगाकर चांद की चांदनी में रखें और दूसरे दिन इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।

कहा जाता है कि आज के दिन चांद को देखने से आखों की रोशनी बढ़ती है। क्योंकि चांद की रोशनी आज के दिन बहुत ठंडी होती है।

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