भारत में शराब का क्या है पीने और बनाने का फार्मूला : जानिए

0

लखनऊ. पीने से पहले यह जानना जरुरी हैं कि आप जो पीरहे है वो किस्से बना है और कैसे बना हैं. जिसे हम बियर के नाम से बुलाते है वोह जौ के पानी से बनता है. अंगूरों में खमीर उठाकर बनाए गए ड्रिंक को वाइन और डिस्टिल्ड प्रोसेस से बनने वाले ड्रिंक्स को व्हिस्की या फिर देशी बोलचाल में शराब भी कहा जाता है.

शराब

शराब के साथ बात जरा अल्कोहल की भी
अगर बात शराब कि करे तो ‘एल्कोहॉल’ का नाम जरुर दिमाग में आता हैं. अगर बात करे ‘एल्कोहॉल’  की तो कई दूसरे प्रकार भी हैं, जो इन ड्रिंक्स को इस तरह से बांटने के बाद भी बचे रह जाते हैं, जैसे सेब और नाशपाती से बनने वाली साइडर या फिर चावल से बनने वाली सेक ड्रिंक। इन ड्रिंक्स की मौजूदगी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दर्ज किया है।
कुछ ड्रिंक्स चारे से भी बनती हैं. इस तरह की बियर को भी ‘अन्य’ ड्रिंक्स की श्रेणी में रखा जाता है। चारा एक किस्म का अनाज है, जिसकी पैदावार गर्म मौसम में बेहतर ढंग से हो पाती है और इसी वजह से सहारा के आस-पास के अफ्रीकी इलाके में इसका सेवन करने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसी तरह हाइब्रिड डिस्टिलेशन से बनने वाली वाइन पोर्ट को भी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ‘अन्य’ ड्रिंक्स की श्रेणी में रखा है।
पीने का गणित, देखिये क्या कह रहा ड्रिंकिंग कैलकुलेटर
यह कैलकुलेटर नतीजों को साफ़ तौर से दिखा रहा है. इस कैलकुलेटर के जरिए तुलनात्मक नतीजे सामने आरहे हैं, जो दिखाते हैं कि किस देश में किस किस्म की ‘एल्कोहॉल’ ड्रिंक का चलन सबसे ज्यादा है। इसमें डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों को दिखाया गया है, जिन्हें 15 वर्ष से ज्यादा उम्र के ड्रिंक पीने वाले पुरुषों और महिलाओं के आधार पर जमा किया गया है। डब्ल्यूएचओ ने अपने आंकड़ों में माना है कि बियर की एक छोटी बोतल में 5%, वाइन में आमतौर पर 12% और ‘स्पिरिट’ में 40% तक ‘एल्कोहॉल’ होता है।

loading...
शेयर करें