देश की रक्षा करने वाले लखनऊ के इस शहीद को भूल गए गृहमंत्री

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लखनऊ। साल 2001 में जब देश की सीमा पर आतंकियों ने हमला किया तो लखनऊ के वीर सपूत लेफ्टिनेंट नवनीत राय ने उनसे सीधी टक्कर ली। आतंकियों के ठिकाने नेस्तनाबूत करने के दौरान एक गोली सीधे नवनीत के सिर में जा लगी। 29 जनवरी को उनके शहीद होने की खबर पर पूरे देश के आंसू बहाए और फर्क भी महसूस किया। लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर जब शहीद नवनीत राय का पार्थिव शरीर लाया गया, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

शहीद नवनीत राय

शहीद नवनीत राय की अमरगाथा

इसके बावजूद ऐसे वीर सपूत के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने वादा किया था कि पेपरमिल कॉलोनी के वाल्मीकि पार्क में श्रद्धास्वरूप शहीद नवनीत राय की प्रतिमा लगवाई जाएगी। लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ। पेपरमिल कॉलोनी में शहीद नवनीत राय का घर है। उनके परिवार और आसपास के लोग भी अपने बेटे की प्रतिमा लगने का इंतजार कर रहे हैं।

एक बार नगर निगम ने अपनी कार्यकारिणी में पेपर मिल कॉलोनी को शहीद नवनीत राय नगर करने का प्रस्ताव भी पास किया। लेकिन यह भी आज तक संभव न हो सका। कॉलोनी के लोगों बार-बार इसकी मांग कर रहे हैं। हर साल 29 जनवरी आते ही नवनीत की याद ताजा हो जाती है और गृहमंत्री राजनाथ सिंह का वो वादा भी याद आता है।

पेपरमिल कॉलोनी के लोगों ने भोजपुरी समाज के अग्रणी व्यक्ति परमानंद पाण्डेय के नेतृत्व में कई बार इसकी मांग उठाई है। परमानंद पूछते हैं कि मूल रूप से गोरखपुर के गोला बाजार के रहने वाले शहीर नवनीत राय की याद में एक प्रतिमा तक नहीं लगवाई जा सकती। वह कहते हैं, ‘जब देश के गृहमंत्री अपना वादा भूल गए तो नगर निगम से क्या उम्मीद की जाए।’

हालांकि परमानंद की कोशिशों और स्थानीय लोगों की मांग को देखते हुए नगर निगम ने साल 2014 की शुरुआत में अमर शहीद कैप्टन नवनीत राय द्वार का लोकार्पण कराया था। लेकिन सालों पुरानी प्रतिमा की मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी है।

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