शहीद लांस नायक गोस्‍वामी को मरणोपरांत अशोक चक्र

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देहरादून। देवभूमि के वीर सपूत बहादुरी दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। एक बार फिर अपनी वीरता से यहां के सपूतों ने न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देशवासियों की छाती फख्र से चौड़ी कर दी है। उत्तराखंड के सपूत और शहीद लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी को राष्ट्रपत‌ि प्रणब मुखर्जी ने राजपथ पर मरणोपरांत अशोक चक्र से नवाजा है। शहीद की पत्नी ने राष्ट्रपत‌ि से सर्वोच्च वीरता पुरस्कार ग्रहण क‌िया। जबकि दून के शहीद राइफलमैन शिशिर मल्ल को उनकी वीरता और अदम्य साहस के लिए सेना मेडल दिया गया है। शांतिकाल में सैन्य अभियान के दौरान अदम्य वीरता के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए अशोक चक्र दिया जाता है। इस बार अशोक चक्र उत्तराखंड के सपूत और शहीद लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी को मरणोपरांत दिया गया। इसके साथ ही दो वीर सपूतों समेत गढ़वाल और कुमाऊं रेजीमेंट के कई सैनिकों को भी राष्ट्रपति ने वीरता पदकों से अलंकृत किया।

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शहीद लांस नायक थे इलीट पैरा कमांडो में

नैनीताल के बिंदुखत्ता के रहने वाले लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी ने 2002 में सेना की इलीट पैरा कमांडो को ज्वाइन किया और यूनिट के सबसे जाबांज सैनिक के रूप में खुद को साबित भी किया। उन्होंने अपनी यूनिट के तमाम बड़े अभियानों में बढ़चढ़कर भाग लिया। खासकर जम्मू-कश्मीर में आतंक विरोधी अभियानों में उन्होंने बड़ी कामयाबी हासिल की। मातृभूमि के लिए शहीद होने से पहले लगातार ग्यारह दिन तक शहीद गोस्वामी ने जम्मू-कश्मीर के तीन बड़े आतंक विरोधी अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए दस आतंकी मार गिराए थे।

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घायल होकर भी आतंकियों से लेते रहे मोर्चा

लांस नायक मोहन के तीन साथी अचानक आई गोलीबारी में घायल हो गए। मोहन ने पहले एक आतंकी को निशाना बनाया और घायल साथियों को पेड़ की आड़ में ले गए। इस बीच उनके एक टांग पर गोली लग गई। लेकिन वह हार नहीं माने और अपने साथियों को सुरक्षित कर दोबारा फायर खोला, जिसमें एक आतंकी और मारा गया। तीसरे आतंकी ने उनपर गोली चलाई, जो उनके पेट में जा लगी। साथी टुकड़ी ने इस बीच तीसरे आतंकी को मार गिया। लेकिन गंभीर रूप से घायल मोहन रुके नहीं। उन्होंने चौथे आतंकी तक पहुंच कर उसे प्वाइंट ब्लैंक से शूट किया। उनके इस अदम्य साहस और सर्वोच्च कुर्बानी के लिए उन्हें सर्वोच्च सैन्य पदक अशोक चक्र से सम्मानित किया।

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दून के शिशिर को सेना पदक

वहीं दून के चंद्रबनी निवासी राइफलमैन शिशिर मल्ल बारामुला (कश्मीर) के राफियाबाद में आतंकियों से लोहा लेते शहीद हुए थे। 32 राष्ट्रीय राइफल्स के शिशिर की शिक्षा-दीक्षा राजा राममोहन राय एकेडमी से हुई। पिता सूबेदार मेजर स्वर्गीय सुरेश मल्ल के ही नक्शे कदम पर चलते हुए वह वे वर्ष 2005 में फौज में भर्ती हुए थे। शिशिर भी उसी 3/9 जीआर का हिस्सा बने जिससे पिता सेवानिवृत्त हुए थे। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर वह सदा-सदा के लिए अमर हो गए।

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कुमाऊं रेजीमेंट के पदक धारक

शौर्य चक्र – नायक खीम सिंह मेहरा (21 कुमाऊं) और लेफ्टिनेंट हरजिंदर सिंह ( 3 कुमाऊं)

सेना मेडल – हवलदार दीवान सिंह ( 3 कुमाऊं)

सेना मेडल (उल्लेखनीय सेवाएं) – ब्रिगेडियर विरेश प्रताप सिंह

गढ़वाल रेजीमेंट के पदक धारक

सेना मेडल (उल्लेखनीय सेवाएं) – ब्रिगेडियर शांतनु दयाल, कर्नल गोविंद प्रवीण, कर्नल गिरिधर डोंडीराम कोले।

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