शाहरुख खान थे मुस्लिम, गौरी के पिता को मंजूर नहीं थी दोनों की शा‍दी

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मुंबई। शाहरुख खान को भले ही रोमांस का किंग कहा जाता हो लेकिन सच ये है कि एक समय उन्‍हें भी ये लगने लगा था कि वो अपने प्‍यार को खो देंगे। जी हां, शाहरुख खान पर तो लाखों-करोड़ों दिल अपनी जान देते हैं लेकिन उनका दिल सिर्फ और सिर्फ गौरी के लिए ही धड़कता है। शाहरुख का नाम आज से पहले कई बार कई एक्‍ट्रेसेस के साथ जोड़ा गया लेकिन इससे शाहरुख और गौरी के रिश्ते में किसी भी तरह का कोई असर देखने को नहीं मिला। लेकिन इससे पहले एक वक्‍त ऐसा भी था जब शाहरुख को गौरी के लिए बहुत ही ज्‍यादा संघर्ष करना पड़ा।

शाहरुख खान

शाहरुख खान और गौरी की प्रेम कहानी

शाहरुख खान पहली बार गौरी से साल 1984 में मिले थे। दिल्‍ली के एक फाइव स्‍टार क्‍लब में पार्टी के दौरान दोनों की मुलाकात हुई। इसी पार्टी में 18 साल के शाहरुख खान की नजर 14 साल की गौरी छिब्‍बर पर पड़ी। पहली बार ही गौरी को देखते शाहरुख के दिल में कुछ कुछ होने लगा। शाहरुख पार्टी में गौरी के साथ डांस करना चाहते थे लेकिन अपने शर्मीले स्‍वभाव की वजह से उनसे पूछ नहीं पाए। इसके लिए उन्‍होंने अपने एक दोस्‍त की मदद ली। वहीं दूसरी ओर गौरी को पहली बार में शाहरुख ज्‍यादा पसंद नहीं आए।

शाहरुख गौरी को पसंद तो करने लगे लेकिन अब बात फंसी की उनसे बात कैसे की जाए और उनका नंबर कैसे लिया जाए। पहली मुलाकात में तो ये मुमकिन नहीं हो सका। 25 अक्‍टूबर 1984 को हुई तीसरी मुलाकात में शाहरुख गौरी का नंबर हासिल करने में कामयाब हो गए। उनके घर का नंबर मिलने के बाद शाहरुख अपनी एक दोस्‍त के जरिए गौरी के घर पर फोन करवाते थे। फोन उठते ही शाहरुख की दोस्‍त अपना नाम शाहीन बताती थी इससे गौरी को पता चल जाता था कि शाहरुख का ही फोन है। दरअसल इन दोनों की लव स्‍टोरी में ये नाम एक कोडवर्ड की तरह था।

कई बार पार्टीज में मिलने के बाद शाहरुख खान ने अभी तक गौरी को प्रपोज नहीं किया था। वे पार्टीज में मिलते तो थे पर अकेले न मिल पाने के कारण शाहरुख गौरी को प्रपोज नहीं कर पा रहे थे। लेकिन समय बदला और शाहरुख गौरी को ड्राइविंग सिखाने लगे। मुश्‍ताक शेख की किताब शाहरुख कैन में शाहरुख ने खुद बताया कि एक दिन जब उन्‍होंने गौरी को उनके घर छोड़ा तभी उन्‍होंने गौरी के गाड़ी से उतरते ही उनसे पूछ लिया कि वह उनसे शादी करना चाहते हैं। लेकिन इसके बाद शाहरुख गौरी का बिना जवाब सुने ही वहां से चले गए।

शाहरुख खान

एक मैगजीन में छपे आर्टिकल में शाहरुख खान ने बताया कि उस वक्त गौरी को लेकर मेरी दीवानगी बेहद बढ़ चुकी थी। अगर वो स्विमसूट पहनती या अपने बाल खुले रखती तो मैं उनसे लड़ने लगता था। खुले बालों में गौरी बेहद खूबसूरत लगती थी। मैं नहीं चाहता था कि दूसरे लड़के उसे देखें। मेरे अंदर इनसिक्योरिटी पैदा हो गई थी, क्योंकि हम ज्यादा मिल नहीं पाते थे और अपने रिलेशन के बारे में ज्यादा बात नहीं कर पाते थे। राइटर मुश्ताक शेख की बुक शाहरुख कैन के मुताबिक उस वक्त शाहरूख गौरी से कहते थे कि मैं ये नहीं कहता कि मेरे साथ बैठो, बस दूसरों के साथ मत बैठो।

शाहरूख एक मीडिल क्लास मुस्लिम फैमिली से थे। जब शाहरूख 15 साल के थे, तब उनके पिता मीर ताज मोहम्मद की कैंसर से मौत हो गई थी। उनकी मां लतीफ फातिमा एक्सेक्यूटिव मजिस्ट्रेट थी। शाहरूख की मां उन्हें और उनकी बहन शहनाज लालारूख के साथ दिल्ली के गौतम नगर में रहने लगी थी।

वहीं दूसरी तरफ गौरी एक अमीर पंजाबी ब्राह्मण परिवार से थी। उनके पिता रिटायर्ड आर्मी अफसर रमेश छिब्बर थे। गौरी दिल्ली के पॉश इलाके पंचशील पार्क में एक ज्वॉइंट फैमिली में रहती थी। घर में उनके मामा तेजिंदर तिवारी और उनकी फैमिली समेत 15 लोग रहते थे। शाहरूख और गौरी के प्यार में धर्म के साथ-साथ आर्थिक स्टेट्स भी बड़ा सवाल था।

शाहरूख और गौरी के इस प्यार को 5 साल हो गए थे। शाहरूख टीवी सीरियल्स दूसरा केवल और दिल दरिया की शूटिंग में बिजी हो गए। वहीं गौरी दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन करके फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करने लगी थीं। धीरे-धीरे गौरी अपने रिश्ते को लेकर परेशान होने लगीं। धर्म, आर्थिक स्टेट्स और शाहरूख का पॉजिसिव नेचर इन सबके चलते गौरी शाहरूख से दूर होने लगी थी।

गौरी को लेकर शाहरूख की दीवानगी दिनों दिन बढ़ती ही जा रही थी। जब गौरी का 19वां बर्थडे आया तो शाहरूख ने अपने कमरे को बहुत खूबसूरती से सजाया और गौरी के लिए बहुत से गिफ्ट्स रखे। अपने बर्थडे के लिए शाहरूख का ये दीवानापन देखकर गौरी की आंखे भर आईं। शाहरूख को समझ ही नहीं आया कि वे रो क्यों रही है। अपने बर्थडे के अगले ही दिन गौरी उन्हें बिना बताएं अपनी फ्रेंड्स के साथ मुंबई चली गई।

गौरी के जाने के बाद शाहरूख को अहसास हुआ कि वह उनके बिना नहीं रह सकते हैं। शाहरूख ने अपनी मां को सारी बात बताई, तब उनकी मां ने शाहरूख को 10,000 रूपए देकर गौरी को ढूंढने के लिए मुंबई भेज दिया। फिर शाहरूख मुंबई गए और गौरी की तलाश में पूरे शहर में भटकते रहे। शाहरूख के पास गौरी का कोई एड्रेस नहीं था, लेकिन वे इतना जानते थे कि गौरी को समंदर किनारे जाना बेहद पसंद है। शाहरूख ने गौरी को खूब ढूंढा, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चल पा रहा था। उनके दोस्त उन्हें बार-बार दिल्ली जाने के लिए बोल रहे थे। शाहरूख मुंबई में 2 दिन अपने दोस्त के घर रहे, लेकिन जब उसके पैरेंट्स आ गए तो शाहरूख ने वीटी स्टेशन की बेंच पर रात गुजारी।

मुश्ताक शेख की बुक में शाहरूख के दोस्त बेनी ने बताया कि वीटी स्टेशन की बेंच पर रात गुजारने के बाद जब हम सुबह उठे तो होटल ताज में मरम्मत का काम चल रहा था। हम चुपके से होटल के बाथरूम में घुस गए और वहां नहा कर तैयार होकर मरीन ड्राइव चले गए। यहीं आकर शाहरूख ने मेरे सामने कहा था कि एक दिन मैं इस शहर पर राज करूंगा।

गौरी की तलाश में शाहरूख ने बेंच पर रात बिताई, सड़कों पर खाना खाया, लेकिन गौरी का कुछ पता नहीं चल पाया। इससे शाहरूख बहुत निराश हो गए। उत्तर मुंबई के गोराई बीच से लौटते हुए शाहरूख को एक प्राइवेट बीच दिखा, उन्होंने ऑटो ड्राइवर को उस बीच पर चलने के लिए कहा। बस यहीं शाहरूख का गौरी से मिलन हुआ। अपनी जीवनी में शाहरूख ने बताया कि वो वहीं थी। एक टी-शर्ट पहने हुए…समंदर किनारे खड़ी थी। वो मेरे पास आई और मुझे गले से लगाकर रोने लगी। तब मुझे लगा कि मैं बेकार में ही उस पर जरूरत से ज्यादा हक जमाने लगा था। मुझे अहसास हो गया कि मुझसे ज्यादा गौरी से कोई प्यार कर ही नहीं सकता। उस वक्त दोनों को लगा कि अब वह एक-दूसरे से जुदा नहीं रह सकते और उन्होंने शादी करने का फैसला ले लिया।

शाहरूख और गौरी की लव स्टोरी का सबसे मुश्किल दौर तब ही शुरू हो गया। दोनों की शादी में सबसे बड़ी मुश्किल थी, दोनों का अलग-अलग धर्मो से होना। शाहरूख मुस्लिम थे और गौरी हिंदू ब्राह्मण। गौरी के पैरेंट्स को रिश्ता बिल्कुल मंजूर नहीं था। उस वक्त शाहरूख सैटल्ड नहीं थे, जिसके चलते भी गौरी के पैरेंट्स को वह पसंद नहीं थे।

शाहरूख और गौरी की शादी के लिए गौरी के पैरेंट्स ने बिल्कुल मना कर दिया। लेकिन दोनों ने उनको खूब समझाया और आखिरकार उन्हें मनाने में कामयाब रहे। गौरी के पिता ने हां कर दी और 1991 में शाहरूख और गौरी की शादी हुई। तब गौरी केवल 21 साल की थी। वहीं शाहरूख बॉलीवुड में हीरो बनने का सपना देख रहे थे।

करियर के शुरूआती कठिन दौर में गौरी ने हमेशा शाहरूख का साथ दिया। गौरी के साथ और शाहरूख की कड़ी मेहनत ने उन्हें आज बॉलीवुड का किंग खान बना दिया। आज दोनों बॉलीवुड के सबसे कामयाब कपल्स में शुमार हैं। शाहरूख और गौरी के तीन बच्चे आर्यन, सुहाना और अबराम हैं।

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