शिवभक्‍तों के‍ लिए इस मुस्लिम ने दांव पर लगाया धर्म, कर रहा बीस साल से सेवा

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नई दिल्ली। दुनिया में कई ऐसे लोग भी हैं जिन्हें किसी भी समुदायों के बीच तनातनी से कोई फर्क नहीं पड़ता। वो बस हर किसी की मदद करने में विश्वास रखते हैं चाहे वो हिन्दू, मुस्लिम किसी भी धर्म का हो। साल 2013 में हुए मुजफ्फरनगर के दंगों की अगर बात करें तो इसकी सोशल मीडिया से लेकर हर तरह काफी आलोचनाएं की गयी लेकिन ऐसे ही एक व्यक्ति हैं जिनपर इसका कोई असर नहीं पड़ता।

समुदायों के बीच तनातनी

समुदायों के बीच तनातनी को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते

दरअसल, मुजफ्फरनगर के आसिफ (45) राही कभी भी हिन्दू-मुस्लिम के सांप्रदायिक तनावों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते। वो करीब पिछले दो दशकों से शिव के उन भक्तों की सेवा कर रहे हैं जो सावन के दौरान कांवड़ लेकर निकलते हैं। वो पूरे मन और जोश से शिवभक्तों की सेवा करते हैं

आसिफ का ट्रांसपॉर्ट का कारोबार है। इसके अलावा वो समाज की सेवा भी काफी मन से करते हैं। उन्होंने खुद की पैगाम-ए-इंसानियत नाम से सामाजिक संस्था शुरू की है। वो पिछले 20 सालों से कांवड़ियों के लिए शिविर का आयोजन करते हैं। उनका मानना है कि इसके जरिये देश के दो संप्रदायों के बीच की खाई को किया जा सकता है।

उनके शिविर में दर्जनों कांवड़िए रुकते हैं और उनकी इस दया भावना का सम्मान भी करते हैं। नवभारत टाइम्स के मुताबिक, दिल्ली के योगेश चौधरी ने बताया कि ‘मैं तीन साल से कांवड़ यात्रा कर रहा हूं। मैं किसी भी तरह के भेदभाव या नफरत को नहीं समझता। जब मुजफ्फरनंगर दंगों का दर्द ताजा था उस दौरान भी शिविर में काफी कांवड़िए आए थे’।

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