यूपी में कांग्रेस की सीएम कैंडिडेट शीला दीक्षित के बेटे बीजेपी में हो सकते हैं शामिल

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लखनऊ शीला दीक्षित भले यूपी में कांग्रेस का चेहरा बन गई हो लेकिन उनकी दिल्ली से विदाई उनके बेटे संदीप दीक्षित के लिए कुछ अच्छी साबित होते दिखाई नहीं दे रही है। पूर्वी दिल्ली से सांसद रह चुके दीक्षित ने अपने ब्लॉग के जरिए गुस्सा निकाला है। ब्लॉग में उनके निशाने पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन रहे।

शीला दीक्षित

शीला दीक्षित और माकन एक दूसरे के विरोधी माने जाते हैं

बताया जाता है कि दिल्ली की राजनीति में भी माकन और शीला दीक्षित एक दूसरे के विरोधी माने जाते थे। एक अंग्रेजी समाचार वेबसाइट पर प्रकाशित ब्लॉग में संदीप दीक्षित ने लिखा है कि पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व उनके ‘विद्रोही स्वभाव’ के कारण उन्हें पसंद नहीं करता है। उन्होंने लिखा कि तो मुझे कहां लाकर छोड़ा गया है?

अजय माकन पर हमला करते हुए दीक्षित ने उन्हें अपनी मां शीला दीक्षित को राजनीति में ले जाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। जहां तक दिल्ली यूनिट की बात है तो मैं ऐसे नेतृत्व को स्वीकर नहीं कर सकता हूं जिसका पूरा ध्यान शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली सरकार को खारिज करने में रहा हो। संदीप दीक्षित ने लिखा कि दिल्ली कांग्रेस कमेटी का नेतृत्व एक ऐसा शख्स कर रहा है जो सीधे-सीधे लगातार शीला दीक्षित पर निशाना साध रहा है। संदीप ने माकन पर कैग के कॉमवेल्थ रिपोर्ट के गलत तथ्यों को मीडिया तक पहुंचाने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने लिखा कि माकन ने सीएजी कॉमलवेल्थ रिपोर्ट का झूठा सिनॉप्सिस तैयार कराया, मनगढ़ंत आरोप लगाकर उसे मीडिया के पास भेज दिया गया। ऐसा सीएजी रिपोर्ट आने से पहले किया गया और उस मीडिया हाउस ने उन आरोपों को ब्रॉडकास्ट भी कर दिया। दीक्षित ने आगे लिखा कि मेरे सामने फिलहाल तीन रास्ते हैं। पहला कांग्रेस जिसमें वह यकीन करते हैं, दूसरा बीजेपी और तीसरा आप। जहां तक आप का सवाल है उसका पूरा कैंपेन शीला दीक्षित सरकार के खिलाफ था। वहीं, बीजेपी एक अभिशाप जैसी है। विकल्प के बारे में उन्होंने आगे कहा कि अब मैं ऐसे मवेशी की तरह घास की तलाश करूंगा जहां मुझे सम्मान मिले, मेरा आत्मसम्मान बरकरार रहे।

संदीप दीक्षित से जब इसे लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ब्लॉग में लिखी गई हर बात सच है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीसी चाको ने कहा कि माकन और संदीप दीक्षित साथ साथ काम कर रहे हैं। कई बार एक ही पार्टी में किसी विषय पर अलग अलग मत होते हैं लेकिन दोनों एक साथ है, एक पार्टी में है। माकन को संदीप का पूरा सहयोग है।

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