शुक्र दिलाये सुख

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शुक्रसुख की चाह हर एक को होती है। लोग कहते हैं कि हमारे नसीब में सुख कहां। हमारा जीवन तो ऐसे ही बीत गया। कारण हमने सुख का रास्ता ही नहीं चुना। हर इंसान मंजिल पर पैदा नहीं होता। मंजिल तलाशनी भी पड़ती है। और फिर किसी की मंजिल दूर है तो किसी की पास। मुंह में आकर कोई नहीं खिलाएगा। आइये जानें सुख के देवता शुक्र को।

सुख के देवता शुक्र हैं। यह दानवों के गुरु शुक्राचार्य का स्वरूप है। सुख, सौभाग्य और समृद्धि का कारक भी। शुक्राचार्य बहुत योग्य गुरु थे। शिव के परम भक्त भी थे। शिव की कठोर तपस्या करके उन्होंने मृत संजीवनी विद्या प्राप्त की थी, जिससे वह युद्ध में मारे गये दानवों को जीवित कर देते थे। शिव की कृपा से ही शुक्राचार्य तीनो लोकों की सम्पत्तियों के स्वामी भी हैं। वह तीनों लोकों का कल्याण करते हैं।

मत्स्य पुराण के अनुसार इनका वर्ण श्वेत है, वाहन रथ है, जिसमें अग्नि के समान आठ घोड़े जुते रहते हैं।

शुक्र ग्रह से स्वास्थ्य, धन सम्पदा, स्त्री सुख, रोग नशा। कलह नपुंसकता को देखा जाता है।

किन राशियों में शुक्र शुभ

वृष, मिथुन, तुला, मकर, कुंभ, मीन राशियों में शुक्र शुभ होते हैं जबकि कर्क, सिंह, कन्या, राशियों में मध्यम और मेष, वृश्चिक, धनु में अशुभ होते हैं।

किस ग्रह के साथ कैसा असर

कुण्डली में सूर्य के साथ या बिलकुल पीछे होने पर कमजोर होते हैं। यदि गुरू के साथ हों तो जीवन में अशांति बढ़ जाती है। शनि के कमजोर होने से शुक्र के सुख कम, शनि मजबूत होने पर  सुख ज्यादा। शुक्र के साथ राहु या मंगल हो तो विवाहित जीवन में बाधा। शुक्र चन्द्र के साथ हों तो माता को कष्ट। शुक्र-गुरू के साथ हों तो घर की स्त्रियों में तनाव रहता है। इस तरह यह हर प्रकार का सुख देते हैं।

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