अंतरिक्ष के क्षेत्र में योगदान के लिए भारतीय सांइटिस्ट कुलकर्णी को मिला डैन डेविड पुरस्कार

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नई दिल्‍ली। भारत के लिए गुरुवार का दिन काफी लाभदायक रहा। पहला कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगा दी गई। दूसरा भारतीय सांइटिस्‍ट श्रीनिवास कुलकर्णी को डैन डेविड पुरस्‍कार मिला। कुलकर्णी को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए यह पुरस्‍कार दिया गया।

श्रीनिवास कुलकर्णी को डैन डेविड पुरस्‍कार

श्रीनिवास कुलकर्णी को डैन डेविड पुरस्‍कार मिलने से भारत का बढ़ा रौब

अभी तक जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक श्रीनिवास कुलकर्णी कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एस्ट्रोफिजिक्स एंड प्लेनेटेरी साइंस के प्रोफेसर हैं। मिली खबरों के मुताबिक कुलकर्णी को ‘पैलोमर ट्रेन्शेंट फैक्ट्री’ के संचालन के लिए जाना जाता है। यह रात के समय आकाश के एक बड़े क्षेत्र का सर्वेक्षण है, जो कि अस्थिर एवं क्षणिक सिद्धांतों की खोज के लिए किया गया। इस सर्वेक्षण के कारण आकाश में होने वाली क्षणिक घटनाओं के बारे में जानकारी को विस्तार मिला। डैन डेविड फाउंडेशन की ओर से दिए जाने वाले इस पुरस्कार में 10 लाख डॉलर दिए जाते हैं। इस संस्था का मुख्यालय तेल अवीव विश्वविद्यालय में है।

21 मई को दिया जाएगा पुरस्‍कार

कुलकर्णी से पहले लेखक अमिताव घोष, संगीतकार जुबिन मेहता और जाने-माने रसायनशास्त्री सीएनआर राव को यह पुरस्कार मिल चुका है। यह पुरस्कार 21 मई को पूर्व विजेताओं की मौजूदगी में दिया जाएगा। हर साल ‘अतीत’, ‘वर्तमान’ और ‘भविष्य’ की श्रेणी में तीन डैन डेविड पुरस्कार दिए जाते हैं, जिनमें प्रत्येक विजेता को 10 लाख डॉलर दिए जाते हैं। ये पुरस्कार उन लोगों को दिए जाते हैं, जिन्होंने विज्ञान, मानविकी या नागरिक समाज में अपने काम के जरिए अदभुत योगदान दिया है।

श्रीनिवास कुलकर्णी ने की है पीएचडी

श्रीनिवास कुलकर्णी का जन्म 4 अक्टूबर को दक्षिणी महाराष्ट्र के एक छोटे से कस्बे कुरुंदवाड में हुआ था। कुलकर्णी ने अपनी प्राइमरी एजुकेशन कर्नाटक के हुबली से पूरी की। इसके बाद उन्होंने फिज़िक्स में एमएस आईआईटी, दिल्ली से की। एमएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद कुलकर्णी अमेरिका चले गए। वहां पर यूनिवर्सिटी ऑफ केलिफोर्निया से उन्होंने पीएचडी की। पीएचडी की पढ़ाई खत्म होने के बाद कुलकर्णी वहीं पर फेक्लटी मेमर बन गए। कुलकर्णी चार देशों की साइंस अकेडमी के सदस्य रह चुके हैं। कुलकर्णी एक वैज्ञानिक के रूप में कई पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र अपना बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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