अश्वेतों की हत्या के आरोप में रूफ को मिली मौत की सजा, लेकिन सालों रहेंगे जिन्दा

वाशिंगटन| अमेरिका की संघीय अदालत ने 2015 में गिरजाघर प्रार्थना में हिस्सा लेने जा रहे नौ अश्वेत नागरिकों की अंधाधुंध गोलीबारी कर हत्या करने वाले डिलन रूफ को मौत की सजा सुनाई है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, 22 वर्षीय डिलन रूफ को 33 अपराधों में दोषी पाया गया, जिसमें अश्वेतों के प्रति नफरत के कारण इस खौफनाक वारदात को अंजाम देना भी शामिल है। अदालत ने यह सजा दो चरणों में हुई सुनवाई के बाद मंगलवार को सुनाई।

संघीय अदालत

संघीय अदालत ने रूफ को सुनाई मौत की सजा 

संघीय अदालत में रूफ ने नस्लीय नफरत के कारण हत्या करने की बात कबूल की है और सुनवाई के दौरान उसमें पश्चाताप का कोई भाव नहीं दिखा और उसने मानसिक रूप से अस्वस्थ होने की बात से भी इनकार किया। हालांकि रूफ को अभी मौत की सजा नहीं दी जाएगी। ऐसा रूफ के इंजेक्शन के जरिए नशीले पदार्थ के सेवन को लेकर है, जिसका मतलब रूफ को मौत की सजा देने में सालों लग सकते हैं।

साउथ कैरोलिना में चार्लस्टन के अफ्रीकी-अमेरिकी चर्च में 17 जून 2015 को नौ अश्वेत नागरिकों की हत्या कर दी गई थी। अधिकारियों ने इसे श्वेत बंधूकधारी द्वारा नफरत से प्रेरित अपराध बताया था, जिसकी पहचान रूफ के रूप में हुई।

पुलिस के अनुसार, गोलियां चलाने से पहले रूफ लगभग एक घंटे तक प्रार्थना सभा में मौजूद रहा। एक कानून प्रवर्तन अधिकारी के हवाले से सीएनएन ने बताया कि गवाहों ने बताया था कि संदिग्ध ने कहा था कि वह अश्वेतों की हत्या करने के मकसद से चर्च आया है।

अमेरिका के दक्षिणी राज्य में इस घटना से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। गोलीबारी की घटना के कारण राजभवन से संघीय झंडे को भी हटा दिया गया था।

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