सऊदी अरब की राजनीति में अब हो रहा बदलाव

रियाद। सऊदी अरब ने अपने देश की नीति में बदलाव किया है। जर्मन खुफिया एजेंसी ‘बीएनडी’ की खबरों को अगर पुख्ता माना जाए तो सऊदी अरब के 29 साल के वाइस क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान दूसरे देश की नीति में हस्तक्षेप करने की नीति को अपना रहे हैं।

सऊदी अरब

सऊदी अरब के प्रिंस बना रहे अस्थिरता का माहौल 

खुफिया एजेंसी ने अपनी डेढ़ पन्नों की रिपोर्ट मे कहा था कि जिस तरह डिप्टी क्राउन प्रिंस इस तरह की आक्रामक नीति अपना रहे हैं उससे देश में अस्थिरता का माहौल बन रहा है। बता दें कि मोहम्मद बिन सलमान किंग सलमान के बेटे हैं।

खुफिया एजेंसी को फटकार
वैसे कभी भी खुफिया एजेंसी इस तरह की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करतीं। इस तरह की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से उथल-पुथल मच सकती है। जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने अपनी खुफिया एजेंसी को फटकार लगाई है।

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किंग अब्दुल्ला की मौत के बाद बदली नीति
2016 की शुरूआत में ही शिया धर्मगुरु अल-निम्र के साथ 46 लोगों को सऊदी ने फांसी दे दी गई। सऊदी ने सुन्नी मुस्लिम बहुल देशों को अपनी तरफ करने की कोशिश की। बता दें कि पिछले साल जनवरी में किंग अब्दुल्ला की मौत के बाद से वहां पर राजनीति बराबर संकट में है।

ईरान से नहीं करेंगे युद्ध
सऊदी अरब के डिप्टी क्राउन प्रिंस ने इस बात को नकार दिया है कि वे ईरान से युद्ध करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा ऐसा कोई विचार नहीं है।

अनुभवहीनता है आक्रामकता की वजह
रिपोर्ट में इस बात को प्रमुखता से कहा गया है कि किंग सलतान की अनुभवहीनता ही आक्रमता की मुख्य वजह है। बीएनडी ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर सऊदी की सारी ताकत मोहम्मद के हाथ आ जाती है तो स्थिति और भी बिगड़ेगी। प्रिंस मोहम्मद सलमान के अहंकार की जानकारी आसपास के सभी देशों को है। उन्हें एक अनुभवहीन राजनेता के तौर पर देखा जाता है।

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