समाजवादी पार्टी में झगड़ा: नरेश अग्रवाल और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरनमय नंदा किए गए बाहर

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लखनऊ,(अनुराग मिश्र)। समाजवादी पार्टी में झगड़ा खत्‍म होने का नाम नहीं ले रहा है। बाप-बेटे की लड़ाई में किसकी जीत होगी यह तो आने वाला समय बताएगा। गौर करने की बात यह है कि मुलायम सिंह और सीएम अखिलेश यादव दोनों शक्ति प्रदर्शन में लगे हैं।   

समाजवादी पार्टी में झगड़ा

समाजवादी पार्टी में झगड़ा बना चर्चा का विषय

विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में झगड़ा एक चिंता का विषय है। वहीं यूपी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के शक्ति प्रदर्शन के बाद सत्ताधारी समाजवादी कुनबे में घमासान अब भी जारी है। लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधियों के राष्ट्रीय अधिवेशन में रामगोपाल यादव ने नेताजी मुलायम सिंह यादव को पार्टी का मार्गदर्शक और उनकी जगह अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित किया। इसके साथ ही उन्होंने शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद तथा अमर सिंह को पार्टी से हटाने का भी प्रस्ताव भी पार्टी कार्यकर्ताओं के ध्वनि मत से पास किया।

समाजवादी पार्टी के कार्यालय पर अखिलेश खेमे का कब्जा

वहीं अखिलेश खेमे द्वारा बनाए गए नए प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम अपने समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी के कार्यालय पर पहुंचकर उसपर कब्जा कर लिया है। रविवार को लखनऊ में अधिवेशन के दौरान रामगोपाल यादव ने शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया था। पार्टी कार्यालय के बाहर संख्या में पुलिस की तैनाती कर दी गई है।

मुलायम ने भी बुलाया अधिवेशन

रामगोपाल की इस घोषणा के बाद मुलायम सिंह यादव ने रविवार के अधिवेशन को असंवैधानिक करार देते हुए इसमें लिए फैसले को रद्द कर दिया। मुलायम ने अब लखनऊ के उसी जनेश्वर मिश्र पार्क में 5 जनवरी को पार्टी अधिवेशन बुलाया है। इसके साथ ही उन्होंने रामगोपाल यादव को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। साथ ही अधिवेशन में शामिल होने पर पार्टी महासचिव और राज्य सभा सांसद नरेश अग्रवाल और सपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरनमय नंदा को पार्टी से निकाल दिया है।

बीजेपी को बनाया निशाना

उन्होंने एक चिट्ठी जारी करते हुए कहा कि कुछ लोग उन्हें अपमानित कर बीजेपी को लाभ पहुंचाना चाहते हैं और उन्हीं लोगों ने आज पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया था। मुलायम अब इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने को भी तैयार दिख रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर कहा है कि अखिलेश यादव की रविवार को हुई सभा को असंवैधानिक थी। हालांकि इससे पहले दो बार रामगोपाल यादव को पार्टी ने निष्कासन का फरमान सुनाया गया था, जिसे कुछ घंटे में ही रद्द कर दिया गया था।

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