सरकारी डाक्टर निजी प्रेक्टिस कर कमाई करने में व्यस्त, मरीज परेशान

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लखनऊ। सरकारी डाक्टर निजी प्रेक्टिस कर कमाई करने में पूरी तरह से संलिप्त हैं। सरकारी डाक्टरों के द्वारा क्लिनिक खोलकर मोटी कमाई करने कि यह चाह मरीजो पर भारी पड़ रही है। सरकारी अस्पतालों में पहुँच रहे मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।

हांलाकि व्यक्ति को जिन्दा रहने के लिए पेट की भूख मिटाना आदमी के लिए मजबूरी होती है। लेकिन यदि पैसे की भूख लग जाये तो व्यक्ति बिना मजबूरी के पैसे कमाने के लिए सही और गलत सभी रास्ते अपनाता है। कुछ इसी तहर का काम राजधानी के सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक कर रहें है।

गौरतलब है कि, सरकार की तरफ से डाक्टोरों को भारी भरकम वेतन मिलाने के बाद भी पैसा कमाने की भूख कम होने का नाम नहीं ले रही है। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

 

सरकारी डाक्टरों

सरकारी डाक्टरों को सरकार देती है बेहतर सुविधा

सरकार इन डाक्टरों को अस्पताल में बेहतर सेवा देने तथा प्राइवेट प्रेक्टिस न करने के एवज में अलग से भत्ता देती है। उसके बाद भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों  के इलाज में महज खाना पूर्ति करते हैं। वहीं अपनी निजी क्लीनिक व अस्पताल में मरीजों का बेहतर इलाज करते हैं। प्राइवेट प्रैक्टिस में डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय से लेकर बलरामपुर अस्पताल के कुछ चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त हैं।

 

ये चिकित्सक क्लीनिक खोलकर निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं

डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.सीबी.चौरसिया पिछले 20 सालों से लखनऊ के इन्दिरा नगर के ए-ब्लाक में जनमंगल नाम से अस्पताल चला रहे हैं। डॉ. चौरसिया लोहिया अस्पताल से पहले हजरतगंज स्थित डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल मे सालों तक तैनात रहें हैं।

जानकारों की माने तो डॉ. चौरसिया का सत्ता में मजबूत  पकड़ है। इसी के चलते इन्होंने अपना तबादला लोहिया अस्पताल से सिविल अस्पताल में करा लिया । जिससे सरकारी नौकरी भी चलती रहे और अपना अपना अस्पताल भी चलाया जा सके।

कहने के लिए डॉ. चौरसिया ने अपने अस्पताल को चैरिटेबल अस्पताल बना रखा है। और यहां पर गरीब मरीजों को मुफ्त में परामर्श दिया जाता है। लेकिन होता इसका उल्टा हैइस अस्पताल में प्रति मरीज से ये परामर्श के नाम पर 300 रूपये वसूलते हैं ,जिसकी रशीद  भी नहीं देते हैं।

इसके अलावा अस्पताल में भर्ती करने से लेकर पैथालॉजी जांच तक की सुविधा उपलब्ध है।  साथ ही अस्पताल में मेडिकल स्टोर भी खुला हुआ है। जिससें मरीजों को किसी भी कार्य के लिए कहीं बाहर न जाना पड़े। कुल मिलाकर इस चैरिटेवल अस्पताल मे सभी चीज की फीस निर्धारित कर गरीबों को मुफ्त इलाज देने की बात की जा रही है।

डॉ.चन्द्रभान चौरसिया तो बानगी मात्र है।

इन्हीं की तरह बलरामपुर अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.रमेशमणि पिछले 15 सालों से इन्दिरा नगर स्थित वासुदेव क्लीनिक में बैठ कर मरीजों का इलाज करते हैं।

डॉ. मणि इससे पहले बाराबंकी तथा उन्नाव में तैनात रहें हैं। इसके बाद भी सप्ताह में दो दिन छोड़कर शाम और  सुबह दोनों समय इन्दिरा नगर तथा सर्वोदय नगर स्थित दोनों क्लीनिकों को पर मरीजों का चिकित्सकिये परामर्श प्रदान करते रहें हैं।

ऐसे में सवाल उठना लाजमी हैं कि, गैर जनपद में तैनाती होने के बाद भी हप्ते में पांच दिन लखनऊ में मरीज को कैसे देखते रहें हैं। जानकारों की माने तो इन्होंनें अपनी तैनाती जानबूझ कर लखनऊ में कराई है, जिससे निजी प्रैक्टिस कर सकें ।

हांलाकि इस बात की जानकारी अस्पताल प्रशासन के उच्च अधिकारियों को भी है। लेकिन इन चिकित्सकों के खिलाफ अधिकारी भी कुछ नहीं करना चाहते हैं। हालात यह है कि, पूरा का पूरा स्वास्थ्य महकमा कुम्भकरणीय नींद में सोया हुआ है।

 

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