कुछ ही दिनों में भारत बन जाएगा सर्न का सदस्य

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नई दिल्ली: भारत अगले कुछ महीनों में दुनिया की सबसे बड़ी कण भौतिकी की प्रयोगशाला- सर्न (सीईआरएन) का सहयोगी सदस्य बन जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक अधिकारी ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी।

सर्न

सर्न परिषद ने भारत के आवेदन को दी मंजूरी

एक उच्च अधिकारी ने कहा कि भारत के सहयोगी सदस्यता के आवेदन को सर्न परिषद द्वारा सितंबर में मंजूरी मिल गई, औपचारिकता और कागजों पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, यह सर्न का एक सहयोगी सदस्य बन जाएगा। उन्होंने कहा कि औपचारिकताएं अगले कुछ महीनों में पूरी कर ली जाएंगीं।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने हाल ही में इस घटनाक्रम की जानकारी ट्वीट से दी थी।
उन्होंने ट्वीट किया कि भारत सर्न का सहयोगी सदस्य बन जाएगा, यह भारतीय उद्योग के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी के ठेके पाने का बड़ा अवसर है।

सर्न (यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन) विश्व के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली कण त्वरक लार्ज हैड्रान कोलाइडर (एलएचसी) का संचालन करता है। यह हिग्स बोसान (गॉड कण) की खोज से जुड़ा हुआ है। यह सुविधा फ्रांको-स्विस सीमा पर जेनेवा के निकट एक सुरंग के नीचे मौजूद है।

भारत का वर्तमान में पर्यवेक्षक का दर्जा है। जिसमें गैर सदस्य देशों को परिषद की बैठक में भाग लेने और कागजात पाने की इजाजत होती है। इसमें संगठन से जुड़े फैसले में कोई हिस्सेदारी नहीं होती है। एक सहयोगी सदस्य के रूप में भारत संगठन के खुले और प्रतिबंधित सत्र में भाग लेने का हकदार होगा।

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