सुप्रीम कोर्ट को अनदेखा कर रही केरल सरकार, आदेश के बावजूद DGP सेनकुमार को नहीं किया बहाल

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कोच्चि| सर्वोच्च न्यायालय द्वारा टीपी सेनकुमार को केरल लिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद पर बहाल करने का केरल सरकार को आदेश देने के पांच दिन बीतने के बावजूद मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने मुद्दे पर अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है और उन्होंने कानूनी विशेषज्ञों से ताजा कानूनी सलाह मांगी है। सेनकुमार ने शनिवार को राज्य की राजधानी में संवाददाताओं से कहा कि उन्हें कोई चिंता नहीं है और इस मुद्दे पर उनके वकील ‘उचित समय पर उचित प्रतिक्रिया’ देंगे।

सर्वोच्च न्यायालय

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद सीएम ने नहीं उठाया कदम

उन्होंने उन खबरों की पुष्टि करने से इनकार कर दिया, जिनके मुताबिक, उनके वकील सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे और उसका ध्यान इस ओर आकर्षित करेंगे कि राज्य सरकार ने अभी तक आदेश की तामील नहीं की है।

पार्टी की एक बैठक में हिस्सा लेने शनिवार को कोच्चि पहुंचे विजयन ने सेनकुमार को बहाल करने से संबंधित संवाददाताओं के सवालों से कन्नी काट गए। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को केरल सरकार को सेनकुमार को दोबारा प्रदेश का पुलिस महानिदेशक बनाने का आदेश दिया था। न्यायालय ने पाया था कि बीते साल मई में उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई ‘मनमाने’ ढंग से की गई थी।

विजय को कानूनी सचिव पी.जी.हरिंद्रनाथ की तरफ से एक रिपोर्ट दी गई थी, जिसमें बिना विलंब किए सेनकुमार को पद पर बहाल करने की सिफारिश की गई थी। लेकिन उन्होंने ऐसा न कर अन्य कानूनी विशेषज्ञों से मामले में कानूनी सलाह मांगी है।

मंदिर में आग लगने की घटना तथ हत्या के एक मामले से सही ढंग से न निपटने का आरोप लगाते हुए विजयन सरकार ने साल 2016 में सेनकुमार को पद से हटा दिया था। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसे दरकिनार करते हुए उन्हें पद पर बहाल करने का आदेश जारी किया।

सेनकुमार 30 जून को अपने पद से सेवानिवृत्त हो जाएंगे। कानूनी विशेषज्ञ कलीशेवेरण ने संवाददाताओं से कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की तामील में विलंब कर राज्य सरकार परेशानी को बुलावा दे रही है।

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