18 साल पुराना वीडियो आया सामने, सलमान कानून की ऐसी धज्जियां सिर्फ तुम ही उड़ा सकते हो

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सलमान खान भाई, आज तो मान ही गए। तुम ही हो असली हीरो। बाकी तो सब विज्ञान है। इतना दिन से सनीमा देख-देख के ऐसा लगता था, अरे ये लौंडे तो बस कैमरे के हीरो हैं। ये सब हीरोगिरी सिर्फ़ फिल्म के अंदर ही चल सकता है। लेकिन जब तुम्हारे इस केस का फैसला सुना न, तब भरोसा हो गया। नहीं, साला तुम हो हीरो! तुम्हारे सामने तो अपनी कोई बिसात ही नहीं लगती। तुम जब मुंबई के गैलेक्सी अपार्टमेंट से कोर्ट के लिए भी निकलते हो तो लोग ऐसे नहीं भाई-भाई करते हुए, सड़कों पर आ जाते हैं। तुमने ध्यान नहीं दिया होगा है न! तुम्हारे लिए ये सब कौन-सी नई बात है। ये तो रोज़ ही होता होगा!

सलमान खान

सलमान खान का 18 साल पुराना वीडियो आया सामने

अच्छा एक बात बताओ भाई, जब तुम घर से कोर्ट में सुनवाई के लिए निकलते हो और लोग इस तरह से चीख-चीख कर भाई -भाई करते हैं तो तुम्हें कैसा लगता है? फुल हाथ-वाथ हिलाते हुए निकलते हो एकदम जैसे पता नहीं कौन-सा तीर मारने जा रहे हो! तुम अगर हीरो नहीं हो तो कौन संजय दत्त हीरो है क्या! देखो उसका बाप नेता भी था। लेकिन फिर भी उसको जेल में रहना ही पड़ा। रहना पड़ा न! लेकिन तुम देखो, मुंबई से लेकर राजस्थान तक हर जगह से कैसे निकले हो। है कोई दूसरा बॉलीवुड में जिसकी इतनी हैसियत है?

सलमान खान

यहीं पर एक और बात याद आती है, वो जो तुमने गुजरात में पतंग उड़ाई थी। मैंने जब टीवी पर तुम्हें माननीय के साथ पतंग उड़ाता देखा था। तब मैंने टीवी देखते हुए कहा था, यार ये टीवी वाले कुछ भी दिखाते हैं। इनके पास और कोई ख़बर नहीं है क्या। सलमान खान, फलाने के साथ पतंग उड़ा रहे हैं। ये क्या इंटरटेंमेंट चैनल चला रहे हैं! लेकिन अब समझ में आया वो तो भविष्य के हीरो के आने की दस्तक थी। अब देखो जब तुम्हारे केस का फैसला आया तबसे मैंने तुम्हें मान लिया है। अब तुम्हीं से कुछ सीखना और ज़िन्दगी में कुछ करना है। और जो जी में आए वो सब कुछ करना है। बस इन सब के बीच एक बात है जो नहीं भूलनी है वो है, पतंग उड़ाना। शुक्रिया हम जैसों को सीख देने के लिए।

अच्छा एक आखिरी बात जो समझ में नहीं आई। जब तुम्हारे वीडियोज़ से गुज़र रहा था। तब 1998 की कुछ वीडियो दिखीं। जिसे देखकर मैं दंग रह गया। तुमने तो यार तब पतंग भी नहीं उड़ाई थी लेकिन इसके बाद भी तुम मजिस्ट्रेट के सामने जिस अंदाज़ में बैठे हो। ये सिर्फ़ तुम्हीं कर सकते हो। हमारे जैसा आम आदमी तो अपने मोहल्ले के आगे खड़े गार्ड को भी डर से दो बार सलामी ठोंक देता है।

वो बगल वाला आदमी जो तुमसे बार-बार साइन करने की ऐसे गुजारिश कर रहा है.. जैसे तुम कोई सरकारी दफ्तर के अफसर हो और बेचारा किसान अपने नुकसान की भरपाई के लिए आया था।

शुक्रिया एक बार फिर से सलमान जो तुमने हम जैसे आम आदमी को भी ज़िन्दगी खुल कर अपनी शर्तों पर जीना सिखाया। लेकिन बस पतंग उड़ाने की शर्त याद रहे।

तुम्हारा चाहने वाला
शिवेंदु शेखर

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