सावन का पवित्र महीना आज से शुरू, ये है व्रत की पूजा विधि, कथा, मुहूर्त और मंत्र

आज से 6 जुलाई भगवान शिव के प्रिय मास सावन का प्रारंभ हो गया है। इसमें सबसे अच्छी बात ये है कि आज सावन के पहले दिन ही सावन का पहला सोमवार व्रत है। सावन मास में पांच सोमवार पड़ रहे हैं। सावन मास में पांच सावन सोमवार व्रत का विशेष महत्व माना गया है। सावन सोमवार का व्रत रखने वालों के लिए यह उत्तम है। संतान प्राप्ति, उत्तम स्वास्थ्य और मनोवांछित जीवन साथी के लिए यह व्रत किया जाता है। भगवान शिव की आराधना से वैवाहिक जीवन के दोषों तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं कि इस सावन के सोमवार किस तिथि को हैं, इस दिन भगवान शिव की पूजा कैसे करें, किन मंत्रों का जाप करें और व्रत की विधि क्या है?

 

सावन सोमवार का व्रत रखने वाले इस मुहूर्त में करें पूजा

सावन के महीने की शुरुआत कृष्ण पक्ष प्रतिपदा कल यानी 5 जुलाई दिन रविवार को ही सुबह 10.15 से प्रारंभ हो गई थी. लेकिन उदया तिथि के कारण 6 जुलाई, आज सोमवार को पहला दिन माना गया है और ऐसे में सोमवार का व्रत रखने वाले सुबह 9.25 तक अपनी पूजा प्रारम्भ कर दें.

 

इस विधि से करें पूरे सावन पूजा

– रोज सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद शिवलिंग पर जल चढ़ाएं. पंचामृत से अभिषेक करें.

– मंत्र ऊँ नम: शिवाय, ऊँ महेश्वराय नम:, ऊँ सांब सदाशिवाय नम:, ऊँ रुद्राय नम: आदि मंत्रों का जाप करें.

– चंदन, फूल, प्रसाद चढ़ाएं. धूप और दीप जलाएं. शिवजी को बिल्वपत्र, धतूरा, चावल अर्पित करें.

– भगवान को प्रसाद के रूप में फल या दूध से बनी मिठाई अर्पित करें. धूप, दीप, कर्पूर जलाकर आरती करें. शिवजी का ध्यान करते हुए आधी परिक्रमा करें. भक्तों को प्रसाद वितरित करें.

पूजा के बाद पढे़ं ये मंत्र

भगवान शिव से क्षमा याचना मंत्र है। पूजा के बाद भगवान शिव के सामने ये मंत्र पढ़ कर क्षमा मांग लें यदि पूजा में कोई भूल हुई हो तो क्षमायाचना जरुर करे।

आवाहनं न जानामिन जानामि तवार्चनम।

पूजाश्चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर।।

घर पर ही कर सकते हैं शिवजी का अभिषेक

कोरोना वायरस को लेकर भिड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से मनाही है। जो लोग शिवालय नहीं जा सकते हैं। वे अपने घर में ही शिवलिंग का अभिषेक और पूजन कर सकते हैं। जिसके घर पर शिवलिंग न हो। वह आंगन में लगे किसी पौधे को शिवलिंग मानकर या मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उसका पूजन कर सकते हैं। मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजन करने को ही पार्थिव शिवपूजन कहा जाता है। ये पूजा शुभ फल देने वाली मानी जाती है

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