सिपाही भर्ती में यूपी सरकार को नोटिस

इलाहाबाद। सिपाही भर्ती मामले में सूबे की सरकार से उच्च न्यायालय ने जवाब मांगा है। अब सूबे में 41610 सिपाही भर्ती में धांधली का आरोप लगा है। भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ दाखिल याचिका में मुख्य परीक्षा का परिणाम रद्द कर जांच कराने की मांग की गई है। गौरतलब है कि भर्तियों और परीक्षा प्रणाली को लेकर प्रदेश सरकार लगातार निशाने पर चल रही है।

याची धर्मेंद्र कुमार ने 16 जुलाई 2015 को घोषित परिणाम रद्द करने की मांग की है। याचिका पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालेकर सुनवाई कर रहे हैं। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक भर्ती में ऐसे अभ्यर्थियों का भी चयन किया गया जिन्होंने मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा में व्हाइटनर का प्रयोग किया है। इसके अलावा 70 गैर राज्यों के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ देकर चयनित किया गया है।

सिपाही भर्ती

सिपाही भर्ती मुख्य परीक्षा के परिणाम रद करने की मांग

सिपाही भर्ती के विज्ञापन में यह स्पष्ट था कि आरक्षण का लाभ सिर्फ यूपी के लोगों को मिलेगा। यह भर्तियां सूबे में पुलिस की कमी को दूर करने के लिए निकाली गई थीं।  मुख्य परीक्षा में विभिन्न जिलों में पांच साल्वर पकड़े गए थे जो दूसरे के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे। इसकी प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी और इस मुद्दे पर उस समय काफी बवाल भी हुआ था लेकिन प्रतियोगियों की आवाज को प्रदेश सरकार ने अनसुना कर दिया था। दूसरे राज्य के प्रतियोगियों को आरक्षण का लाभ देने के मामले पर भी प्रतियोगियों ने आवाज उठायी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इन हालात में प्रतियोगियों के सामने कोर्ट की शरण में जाने के अलावा कोई और रास्ता  नहीं बचा था। याची का कहना है कि मुख्य परीक्षा का परिणाम रद्द कर पूरे मामले की जांच का आदेश दिया जाएं। कोर्ट ने राज्य सरकार सहित सभी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए याचिका सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

 

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