सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उठे सवाल…क्या अब क़ानून भी महिलाओं को दे रहा आरक्षण?

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए एक नया और अलग ही फैसला सुनाया है। जहां हम अपने फंडामेंटल राइट्स यानी मौलिक आधिकारों की बात करते हैं वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इसके उलट फैसला दिया है। कोर्ट ने क़ानून की समानता को दरकिनार करते हुए महिला अपराधियों के प्रति उदारता दिखाई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद यह चर्चा काफी तेज हो गई है कि क्या अब कानूनी मामलों में भी महिलाओं को ख़ास आरक्षण मिलेगा।

हमारे संविधान में समान अधिकार की बात लिखी है जिसके साथ हमारे कानून ने सबको बराबर माना है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में महिला अपराधी को लेकर को उदारता बरती है। बता दें, हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2000 में हुई वारदात में एक महिला को दोषी पाया गया था। इस वारदात में महिला ने 27000 रुपये की लूट में एक पुरुष की मदद की थी।

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाई कोर्ट के फैसले को बताया सही

ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में महिला को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी लेकिन 2003 में कोर्ट ने महिला को 2 साल की सजा सुनाई क्योंकि महिला तीन बच्चों की मां है जिसमें से उसके दो बच्चे मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट ने महिला पर 6000 रुपयों का जुर्माना भी लगाया था।

बाद में हिमाचल हाई कोर्ट ने 2 साल की इस सजा को भी खत्म करते हुए महिला पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। राज्य सरकार ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने भी हिमाचल हाई कोर्ट के इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह हर केस के तथ्यों पर निर्भर करता है कि उसमें उदारता बरतनी है या नहीं।

इस केस की सुनवाई कर रही जस्टिस एके सिकरी और अशोक भूषण की बेंच ने इस मामले के संदर्भ में महिला अपराधी के प्रति इस तरह की उदारता को जायज बताया है। जस्टिस सिकरी ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बेंच ने पाया कि कोर्ट ने अपने फैसले में जेंडर को एक उचित परिस्थिति के रूप में रखा।

सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच ने आगे कहा कि आरोपी महिला की दो कमजोर परिस्थितियों, एक तो महिला होना और दूसरा 3 बच्चों की मां होना को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है लेकिन ट्रायल कोर्ट को जेल की सजा को पूरी तरह खत्म नहीं करना चाहिए था। फिलहाल ट्रायल कोर्ट की तरफ से दी गई सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।

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