सुशील मोदी ने कहा- हिन्दू-मुस्लिम ने साथ मिलकर लड़ी थी आजादी की लड़ाई

आरा| बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर में आयोजित बाबू वीर कुंवर सिंह के 160वें विजयोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने सोमवार को कहा कि सन् 1857 में हुई आजादी की पहली लड़ाई में जहां हिंदू-मुस्लिम साथ मिलकर ईस्ट-इंडिया कंपनी के खिलाफ लड़े थे, वहीं समाज के दलितों, पिछड़ों की भी इसमें भरपूर भागीदारी रही थी।

बाबू कुंवर सिंह को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताते हुए सुशील मोदी ने कहा कि कुंवर सिंह जी ने अगर शिवाला बनवाया तो आरा, जगदीशपुर में मस्जिदें भी बनवाईं। पीरो के नूर शाह फकीर को 5 बीघा तो नोनउर के बकर शाह फकीर को 10 बीघा लगान मुक्त जमीन दी। धरमन बीवी की बहन करमन के नाम पर आरा में करमन टोला बसाया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1857 में बाबू कुंवर सिंह जैसे वीर बांकुरों के संग्राम का ही नतीजा रहा कि कंपनी बहादुर सरकार (ईस्ट इंडिया कंपनी) को महज डेढ़-दो वर्षो में ही अपनी बोरिया बिस्तर समेट कर भारत छोड़ना पड़ा। आजादी की इस पहली लड़ाई ने 1947 की नींव रखी, जिसके परिणामस्वरूप आज हम आजाद हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दुसाध समाज के लोग बड़ी संख्या में बाबू वीर कुंवर सिंह की सेना में सिपाही थे। नाथू दुसाध बाबू कुंवर सिंह के सिपहसलार थे तथा परछाईं की तरह हमेशा उनके साथ रहते थे। कुंवर सिंह की अदालत में सवर्ण और अवर्णो के साथ समान न्याय होता था, जिसके कर्ताधर्ता द्वारिका माली थे।

सुशील मोदी ने कहा कि बगवां के 29 दुसाध अंग्रेजों के साथ लड़ाई में शहीद हुए, जबकि दावां गांव के दरोगा नट को शिवपुर घाट पर बाबू कुंवर सिंह को बचाने के क्रम में अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

उन्होंने कहा कि कुंवर सिंह के गांव दिलीपपुर के आस-पास के मीठहां, बलुआही, देवाढ़ी, शिवपुर आदि दर्जनों गांवों के दुसाध समाज के लोग उनकी सेना में शामिल थे। समाज के कमजोर वर्गो के प्रति बाबू कुंवर सिंह के लगाव का प्रतीक देवचना गांव है, जहां एक महिला को बहन मानकर उन्होंने 251 बीघा जमीन दी थी, जो आज दुसाधी बघार के नाम से जाना जाता है।

मोदी ने कहा कि अपने लड़ाके सैनिकों की जान उनके लिए कितनी कीमती थी कि सभी सैनिकों को गंगा पार उतारने के बाद अंतिम कश्ती पर खुद सवार हुए, जिस कारण उन्हें अंग्रेजों की गोली का शिकार होना पड़ा।

उल्लेखनीय है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव की 160वीं सालगिरह पर यहां तीन दिवसीय विजयोत्सव समारोह का आयोजन किया गया है। सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस समारोह का उद्घाटन किया।

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