सूफी सम्मेलन में ‘भारत माता की जय’ के नारों से मोदी का स्वागत

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नई दिल्ली। दिल्ली में शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय सूफी सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगे। मोदी ने कहा, ‘सूफी लोगों के लिए खुद की सेवा का मतलब मानवता की सेवा है। इस्लाम का असली मतलब ही शामिल है। अल्लाह की रहमान है, अल्लाह की रहीम है।’ उन्होंने कई सूफी संतों का नाम लेकर कहा, ‘सूफीवाद का अर्थ शांति है। अल्लाह के किसी नाम का अर्थ हिंसा नहीं है।’
सूफी सम्मेलन

सूफी सम्मेलन के मायने

मोदी ने सूफी संत अमीर खुसरों की जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘आठवीं सदी में अमीर खुसरो ने जिस तरह भारतीय संगीत में योगदान दिया, वह अतुलनीय है।’ उन्होंने कहा, ‘भारत की खुली हवा में सूफीवाद निखरा है।’ आतंकवाद का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि इससे हमारा नुकसान होता है। आतंकवाद हमको बांटता है और हमको बर्बाद करता है। आतंकवाद दुनियाभर में बढ़ रहा है। इसके कारण करोड़ाें लोगों को अपना देश छोड़ना पड़ रहा है। अजान के वक्त हमले हो रहे हैं, प्रार्थना के समय हमले हो रहे हैं। यह मानवता नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘एक देश पर हुए आतंकी हमले से कई देशों को नुकसान पहुंचता है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी एक धर्मविशेष की नहीं है। कुछ लोग कैंप लगाकर आतंकवाद की ट्रेनिंग दे रहे हैं। इसे रोकना होगा। बीते साल 90 से ज्यादा देशों ने आतंकवाद झेला।’ हम इसके खिलाफ हैं और नई सोच के साथ काम कर रहे हैं। हमारा नारा है सबका साथ, सबका विकास। हम समानता की बात करते हैं। हम सिर्फ संविधान के अधिकार नहीं बल्कि नैतिक अधिकारों पर भी बात करते हैं।
अपने भाषण के आखिरी हिस्से में मोदी ने स्वामी विवेकानंद को याद किया। महान विचारक के शांति के संदेशों को सुनाते हुए उन्होंने कहा, ‘शांति शांति शांति।’
इस सम्मेलन में पाकिस्तान समेत 20 देशों के 200 से ज्यादा सूफीवाद के जानकार शामिल हुए हैं। पाकिस्तान के राजनेता और इस्लाम के गहरे जानकार ताहिर उल कादरी भी मौजूद हैं। अंतरराष्ट्रीय सूफी सम्मेलन का आयोजन ऑल इंडिया उलेमा और मशाएख बोर्ड (एआईयूएमबी) ने किया है। यह बोर्ड भारत में सूफी दरगाहों का मैनेजमेंट करने वाला शीर्ष संगठन है। अंतरराष्ट्रीय सूफी सम्मेलन को लेकर खुफिया एजेंसियों ने आतंकी हमले की आशंका भी जताई थी, जिसके बाद इस सम्मेलन के मद्देनजर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।
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