सूर्यग्रहण से जुड़े इन अंधविश्वासों की जानें क्या है हकीकत, पढ़े कैसे होता है सूर्य ग्रहण

हिन्दू धर्म शास्त्रों, पुराणों और अन्य धर्म ग्रंथों में सूर्य ग्रहण को अशुभ माना गया है. सूर्य ग्रहण से पड़ने वाले कुप्रभावों से बचने के लिए लोगों में भ्रांतियां और कुछ अंधविश्वास फ़ैल गएँ हैं. आइये यहाँ पर इन्हीं अंधविश्वासों के पीछे की हकीकत क्या है? इसका विश्लेषण करें.

 

घरों से बाहर  निकलें

 

प्राचीन काल में ऋषि मुनियों के द्वारा यह धारणा फैलाई गई कि सूर्य ग्रहण के समय लोगों को विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को घरों से बाहर नहीं निकलना चाहिए. सूर्य ग्रहण के दौरान घर से बाहर निकलने पर अनर्थ हो जायेगा. इस विषय पर आधुनिक विद्वानों का मानना है कि प्राचीन काल में लोगों को ज्ञान नहीं था. उनमें भय पैदाकर काम करवाया जाता था. तब से यही परंपरा चली आ रही है.

पहले समय में सूर्य को ही प्रकाश का एक मात्र स्रोत माना जाता था. सूर्य ग्रहण के समय अंधकार हो जाता था. अंधेरे में घर से बाहर निकलना उचित नहीं होता है. परन्तु आज के समय में प्रकाश के अनेक स्रोत हैं. ऐसे में जो लोग आज भी यह मानते हैं कि सूर्य ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए नहीं तो अनर्थ हो जायेगा. वे अंधविश्वास के शिकार हैं.

गर्भवती महिला पर ग्रहण की साया नहीं पड़ना चाहिए 

 

यह एक बड़ा अंधविश्वास है. इस पर लोगों की अलग –अलग मान्यताएं हैं. कोई कहता कि प्रेगनेंट महिला पर ग्रहण की साया पड़ने से बच्चे अपंग पैदा होते हैं. कुछ लोगों का मानना है कि प्रेगनेंट महिला को अपने शारीर पर गेरू लगा लेना चाहिए. इस विषय पर आधुनिक विद्वानों का कहना है कि ग्रहण के वक्त जो किरणें पृथ्वी पर पड़ती हैं उसके कुछ साइडइफेक्ट होते हैं. इन किरणों से सावधान रहना चाहिए. परन्तु उन्हें इन अंधविश्वासों के बजाय अपने डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए.

ग्रहण में बना खाना जहर हो जाता है.

 

यह धारणा भी अंधविश्वास से जुडी है. चूँकि पहले सूर्य ही प्रकाश के स्रोत थे. इस लिए खाना बनाने और खाने का काम प्रकाश में ही किया जाना चाहिए.ग्रहण के समय अंधकार हो जाता था. इसलिए अन्धकार में भोजन बनाना और भोजन करना दोनों उचित नहीं था, क्योंकि अन्धकार में खाना बनाते समय या भोजन करते समय कुछ भी अनुचित चीज भोजन में पड़ सकती है जो नुकसानदायक हो. नुकसानदायक चीज का भोजन के साथ पेट में चले जाने से जान को खतरा हो सकता है. इसलिए प्राचीन काल में ऐसी मान्यता थी. परन्तु आज के समय में प्रकाश के अनेक स्रोत हैं. इसलिए सूर्य ग्रहण के समय भी लोगों के यहाँ प्रकाश की व्यवस्था होती है. आज की परिस्थितियों में खाना बनाने और खाने की बात प्रासंगिक नहीं है.

ग्रहण के समय भगवान का ध्यान करना चाहिए.

 

प्राचीन काल में सूर्य ग्रहण के समय अंधकार हो जाता था. अंधकार में कोई काम करना संभव नहीं था. इसलिए वे खाली समय में क्या करें? इसी खाली समय के सदुपयोग के लिए कहा जाता रहा कि वे भगवान का ध्यान करें. परन्तु आज ऐसी स्थिति नहीं है. ग्रहण के समय में भी लोगों के पास प्रकाश की उचित व्यवस्था है. इसलिए सूर्य के प्रकाश के अभाव में भी काम किया जा सकता है.

 

राहु और केतु के नाम के दो राक्षसों से जुडी कहानी का सच?

 

लोगों में मान्यता है कि जब राहु और केतु नामक दो राक्षस सूर्य भगवान को निगल लेते हैं तो सूर्य ग्रहण होता है. जब लोग उनसे अनुनय विनय करते हैं तो वे पुनः सूर्य देवता को छोड़ देते हैं. उनके छोड़ने के बाद ही पृथ्वी पर प्रकाश आता है. इस कहानी में कोई सच्चाई नहीं है. विदित है कि सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है. जो सूर्य , पृथ्वी और चंद्रमा के परिभ्रमण काल से उत्पन्न होती है.

सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के मध्य आ जाता है तो सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर नहीं पहुँचता है और अंधकार छा जाता है.

 

सूर्यग्रहण का समय

 

सूर्यग्रहण इस साल 21 जून को लगाने वाला है. इस दिन रविवार है और आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तथा मृगसिरा और आद्रा नक्षत्र. यह सूर्य ग्रहण मिथुन राशि में लगेगा.  सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण रविवार की सुबह 9:15 बजे से शुरू हो जाएगा और 03:04 बजे समाप्त होगा जबकि सूतक काल 20 जून शनिवार की रात 09:25 से शुरू हो जाएगा और ग्रहण की समाप्ति के साथ ही समाप्त होगा.

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