फिल्मों में काम करने के लिए सोनू निगम के पास नहीं है फालतू टाइम

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मुबंई। भारतीय संगीत जगत में हिप-हॉप, जैज और रैप गीतों से लेकर ईडीएम तक सबकी लोकप्रियता लोगों के बीच में बढ़ रही है। यह कहना है दिग्गज पाश्र्व गायक सोनू निगम का। हालांकि, उनका यह भी मानना है कि भारत की अपनी संगीत शैली को विकास के लिए सम्मानजनक मंच की जरूरत है। देश और विदेश में 25 साल से अपने गीतों और आवाज से सभी का मनोरंजन करने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सोनू ने बताया कि, “हमारा भारतीय संगीत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक विकास कर रहा है।”

सोनू निगम

सोनू ने कहा, “एक संगीतकार होने के नाते मैं भारतीय शास्त्रीय संगीत का मूल्य जानता हूं और मेरे विचार में शुद्ध शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ गजल और भजनों जैसी संगीत शैली को भी सम्मानजनक रूप से विकास के अवसर की जरूरत है।” लोकप्रिय गायक ने यह भी कहा कि पहले समय की तुलना में भारतीय संगीत जगत में काफी बदलाव आए हैं।

भारतीय संगीत के फिल्म संगीत के अधिकार क्षेत्र से बाहर आने के बारे में पूछे जाने पर सोनू ने कहा, “मैं ऐसा नहीं कहूंगा कि यह फिल्मों से भी परे हो गया है, लेकिन हां मेरा इरादा स्वतंत्र रूप से संगीत को प्रस्तुत करने का रहा है। आज के समय में तो ऑनलाइन डिजिटल रिलीज एक क्लिक पर ही दर्शकों तक पहुंच जाती है।”

सोनू ने यह भी कहा कि निजी तौर पर संगीत प्रस्तुति के जरिए भारत में गायक का जीवन पूरा होता है और इससे उसे वह करने का अवसर मिलता है, जो वह फिल्मों के जरिए नहीं कर पाता। बॉलीवुड में अभिनय क्षेत्र में वापसी के बारे में पूछे जाने पर सोनू ने कहा, “मैं अपने जीवन और काम के स्तर पर काफी संतुलित स्थान पर हूं, जब तक कोई विषय या कार्य मुझे उत्साहित नहीं करता।” सोनू ने कहा कि उनके बहुमूल्य जीवन से 100 दिन निकाल पाना काफी असंभव है। हालांकि, उन्हें ‘काश आप हमारे होते’ और ‘जानी दुश्मन-एक अनोखी कहानी’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया है।

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