सोशल मीडिया ने बदला एजूकेशन सिस्टम

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सोशल मीडिया आज के समय सोशल मीडिया का ट्रेंड काफी छाया हुआ है। सभी लोग आपस में न बात करके सोशल नेटवर्किंग साइट्स के ज़रिये बात करना ज्यादा पसंद करते हैं। यही वजह है कि अब वेब के ज़रिये ज़्यादातर काम होता है। इतने आकर्षित तरीके से चीज़ों को सोशल मीडिया पर परोसा जाता है कि यूथ का मन बोर हो ही नहीं सकता।

सोशल मीडिया को एजूकेशन  सिस्टम में लाने की तैयारी

यही वजह है कि स्कूल्स और कॉलेजों में फेसबुक,ट्विटर जैसी साइट्स का सहारा लेकर छात्रों को पढ़ाया जाएगा। अगर देश के विकास के साथ साथ इसे भी लागू किया जाएगा,तो तरक्की का इससे बेहतर और कोई तरीका नहीं होगा। पॉज़ीटिव इफेक्ट्स के साथ इसके निगेटिव इफेक्ट्स भी होते हैं।

सोशल मीडिया के ज़रिये की जाएँगी स्टोरीज़ शेयर

स्कूलों से लेकर कॉलेजों तक इसका विकास किया जा रहा है। स्नैपचैट ,इन्स्टाग्राम,ट्विटर के ज़रिये इसकी शुरुआत हो चुकी है। छात्र अपने सक्सेस स्टोरीज को इन साइट्स पर शेयर कर रहे हैं,ताकि हर देश में भी लोग उनकी स्टोरीज़ पढ़ें। यह छात्र  समर इंटर्नशिप्स के ज़रिये प्रोजेक्ट्स पर अपने साथ काम करने का मौका भी देंगे।

दरअसल छात्रों को सोशल मीडिया के बारे में नहीं पढ़ाया जाएगा वो उसके ज़रिये अपने काम को कैसे दिखा सकते हैं, इसपर ध्यान दिया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि कुछ शिक्षकों की डिमांड है। इसको स्कूलों और कॉलेजों में जल्द ही लागू किया जाएगा।

काफी सालों से ब्लैकबोर्ड और मूडल जैसी वेबसाइट्स के ज़रिये ऑनलाइन एजुकेशन का ट्रेंड काफी पॉपुलर रहा है। इसलिए प्राइवेट ही नहीं पब्लिक स्कूलों में भी सोशल मीडिया को लाने की तैयारी है।

सोशल मीडिया को लेकर काफी शिक्षकों की भी यही राय है। केथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ कौरदोबा के बायोलॉजी के अध्यापक ने कहा कि डिजिटल के इस ज़माने में सोशल मीडिया को पढ़ाई में डालना बहुत ही ज़रूरी है। इसके ज़रिये हम अपने छात्रों से अलग किस्म के टास्क भी करा सकते हैं।

 

 

 

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