स्कूली बच्चों ने जब पहली बार देखी सड़कें और उस पर दौड़ती बसें, तो रह गए हक्के-बक्के

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गोपेश्वर: जहां देश आसमान छूने की बात करता है. शहर में बुलेट ट्रेन लाना चाहता हैं. वहीँ भारत-चीन से सटे चमोली के कुछ  गाँव ऐसे हैं जहां अभी तक सड़के नहीं बनी हैं. वहां के लोगों ने अभी साइकिल, बाइक, बस तक नहीं देखी है.

सड़के

जब गाँव के छोटे-छोटे बच्चे राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय डूमक के कुल 24 छात्र-छात्राएं जब भाराड़ी सैण पहुंची तो वह नौनिहाल बच्चे सड़को को फटी हुई आँखों से निहार रहे थे जैसे मानो उन्होंने क्या देख लिया हो.

वहीँ वह बच्चें बड़ी-बड़ी बसों को देख कर डर गए. वही कुछ बच्चों ने अपने शिक्षको से सवाल करना शुरू कर दिया. वह पूछने लगे यह कौन-सी चीज है. तब उनके शिक्षको ने बताया यह बस है. इस बैठने से हमें पैदल नहीं चलना पड़ेगा.

वह नौनिहाल बच्चें गैरसैंण शहर में विधान सभा भवन और अन्य भवनों को देख कर कहने लगे इतने बड़े-बड़े भी घर होते हैं क्या .और उन्होंने कजन मछली देखि तो फुले नहीं समा रहे थे. वह कहने लगे यह सब कुछ कितना अच्छा है. वह ये सारी  नई चीजें देख कर खुशी से झूम उठें.

29 किमी पैदल चलने के बाद जब उन नौनिहालों ने सड़कें और उस पर दौड़ती हुए बसें देखि तो पहले डर गए लेकिन फिर थोड़ी देर बाद ही खुश होकर उसके पीछे-पीछे दौड़ने लगे. कुछ देर पहले वह बच्चे जिस बस के पीछे दौड़ रहे थे कुछ ही सम्स्य बाद उस बस में बैठकर मानो उन्होंने जन्नत की सैर कर ली हो. शहरों की इन सब चीजों को देख कर खुश होने का बस एक की वजह थी. क्योंकि पहाड़ो के बीच पहाड़ी पत्थरों से बने घर के अलावा उन्होंने कभी न तो ऊँचे इमारतों वाले मकान देखें न तो सड़क पर दौड़ती बसें वह ये सब देख कर अपने खुशी को जाहिर करने से रोक नहीं पाए. नौनिहालों ने जड़ी बूटी शोध संस्थान जाकर भी विभिन्न जानकारियां हासिल कीं।

शैक्षिक दल के मुखिया एवं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय डुमक के प्रधानाध्यापक रुद्र सिंह राणा ने बताया कि पहली बार सड़क, बस, ऊंची इमारतें व मछलियां देखकर बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस दल में सहायक अध्यापक विष्णु प्रसाद भट्ट व युद्धवीर सिंह नेगी भी शामिल थे।

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